बेसहारा महिलाओं की मसीहा हैं वृंदावन की लक्ष्मी

मथुरा

वृंदावन की पावन धरती पर भक्ति के सुर गूंजते हैं. लेकिन यहां एक कॉलेज टीचर हैं डॉ. लक्ष्मी गौतम, जो सेवा के सुर भी लगा रही हैं. बेसहारा को सहारा देने की बात हो या लावारिस शवों को मोक्ष दिलाने के लिए अंतिम संस्कार की बात. मथुरा में एक नाम हमेशा आगे रहता है, वह है लक्ष्मी गौतम का. समाज में अनूठी मिसाल पेश कर रहीं लक्ष्मी अब तक कई परिवारों को जोड़ने का काम कर ही चुकी हैं. साथ ही जो लोग बृज में रहकर यहां अंतिम सांस लेते हैं, पूरे रीति-रिवाज के साथ उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी उठाती हैं।
वृंदावन में विधवाओं और लाचार बुजुर्ग महिलाओं के दर्द को अपना बना लेने वाली डॉ. लक्ष्मी गौतम वैसे तो वृंदावन के एक कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं. लेकिन कॉलेज से समय मिलने के बाद वह वृंदावन में दर-दर भटकने वाली लाचार और असहाय महिलाओं की मदद करने निकल पड़ती हैं. इस काम को वह बरसों से कर रही हैं. सड़क पर पड़ी बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाना, भूखी महिला को भोजन उपलब्ध कराना, उनकी पेंशन बनवाना, राशन कार्ड उपलब्ध कराना लक्ष्मी की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।
लक्ष्मी की मेहनत और इस जज्बे को वृंदावन के रिक्शे और तांगे वाले भी समझते हैं. तभी तो वे किसी लाचार महिला को देखते हैं, तो तुरंत उसे उठाकर लक्ष्मी के दरवाजे तक छोड़ जाते हैं. लक्ष्मी भी पूरे मन से पीड़िताओं की सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़तीं. इसके साथ ही वह राज्य सरकार, राज्य महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग की मदद से महिलाओं को न्याय दिलाने का भी काम कर रही हैं।
आपको बता दें कि वह लगभग 50 बुजुर्ग महिलाओं की काउंसलिंग कर पुनः उनके परिवार का हिस्सा बनवा चुकी हैं. समाज सेवा के लिए डॉ. लक्ष्मी को कई सम्मान भी मिल चुके हैं. आध्यात्मिक नगरी वृंदावन में जहां सिर्फ कृष्ण भक्ति की धुन गूंजती है, वहां डॉ. लक्ष्मी गौतम के सेवाकार्य के भी गुणगान होते हैं।
लक्ष्मी बताती हैं कि वो इस काम से जुड़ी तो घरवाले मन से साथ नहीं थे. लेकिन अब उनके दोनों बेटे और एक बेटी सपोर्ट करते हैं. आर्थिक सहयोग भी देते हैं. उन्होंने कनक धारा फाउंडेशन भी बनाया है।

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