दिल की बीमारी मे रामबाण है सिंघाड़ा

मौसम बदलता है तो शरीर को सामंजस्य बैठाने में समय लगता है। ऐसे में कभी-कभी हम मौसम बदलने से बीमार भी पड़ जाते हैं लेकिन यही मौसम गुणकारी खाद्य पदार्थ भी देता है। गर्मी में जब शरीर को पानी की ज्यादा जरूरत होती है, तब तरबूज, खरबूजा और ककड़ी जैसे फल मिलते हैं। इसी तरह सर्दी पड़ते ही हवा खुश्क हो जाती है। ऐसे मौसम में सिंघाड़े जैसे फल भी मिलते हैं। सब्जियां बहुत सी इसी मौसम में मिलती है। तालाबों में सिंघाड़ा अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है लेकिन बाजार में आ गया है। यहां परप हम सिंघाड़े के बारे में कुछ बताना चाहते हैं। लगभग 6 महीने से हमारे देश में कोरोना का प्रकोप चल रहा है। इसकी अभी कोई दवा भी ईजाद नहीं हो पायी है। कोरोना के संक्रमण से डायबिटीज और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। सिंघाड़ा दिल की बीमारी से बचाने में रामबाण का काम करता है।
सर्दियों में सिंघाड़ा खूब मिलता है। इसे कच्चा, उबाल कर या फिर हलवा बनाकर भी खाया जाता है। सिंघाड़ा एक जलीय सब्जी है, जिसे वॉटर चेस्टनट भी कहते हैं। सिंघाड़ा गुणों की खान है। इसमें कई पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं, जो आपकी कई बीमारियों से रक्षा करते हैं। खासकर दिल की बीमारियों के लिए यह रामबाण औषधि है। साथ ही गले में खराश, थकावट, सूजन और ब्रोंकाइटिस में फायदेमंद है।
अस्थमा के मरीजों के लिए सिंघाड़ा बहुत फायदेमंद है। सिंघाड़े को नियमित रूप से खाने से सांस संबधी समस्याओं से भी आराम मिलता है। सिंघाड़ा बवासीर जैसी मुश्किल समस्याओं से भी निजात दिलाने में कारगर साबित होता है। इसके
सेवन से फटी एड़ियां भी ठीक हो जाती हैं। इसके अलावा शरीर में किसी भी स्थान पर दर्द या सूजन होने पर इसका लेप बनाकर लगाने से बहुत फायदा होता है। इसमें कैल्शियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसे खाने से हड्डियां और दांत दोनों ही मजबूत रहते हैं। साथ ही यह आंखों के लिए भी फायदेमंद है।
प्रेग्नेंसी में सिंघाड़ा खाने से मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। इससे गर्भपात का खतरा भी कम होता है। इसके अलावा सिंघाड़ा खाने से पीरियड्स की समस्याएं भी ठीक होती हैं। सिंघाड़ा शरीर को ऊर्जा देता है, इसलिए इसे व्रत के खाने में शामिल किया जाता है। इसमें आयोडीन भी पाया जाता है, जो गले संबंधी रोगों से रक्षा करता है और थायरॉइड ग्रंथि को सुचारू रूप से काम करने के लिए प्रेरित करता है। यदि आप हृदय या रक्तचाप जैसी समस्याओं से बचना चाहते हैं तो सिंघाड़ा जरूर खाएं। सिंघाड़े का आटा रक्तचाप कम करता है। इसमें पोटैशियम होने के कारण यह दिल की धड़कन को सामान्य करने में मदद करता है।

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