जानिए पूरा मामला — ना देखें प्राथमिक विद्यालयों को हीन भावना से, जो कर गुजरने का जज़्बा रखता है उनके लिए स्कूल का स्टैंडर्ड कोई मायने नहीं रखता

Pankaj Kumar

शामली — अभी तक अपने लाखो रुपये फीस भर अच्छी अच्छी स्कूल बसों में बच्चों को स्कूल जाते हुए देखा होगा और ऐसे चमचमाते स्कूलों के सामने प्राथमिक विद्यायल की बात की जाए तो इन स्कूलों को एक हिन्न भावना से देखा जाता है लेकिन जिनके अंदर लगन और कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो उनके लिए स्कूल का स्टैंडर्ड कोई मायने नहीं रखता है। आज हम आपको प्राथमिक विद्यायल के 5 वी क्लास के ऐसे छात्र से मिलवाने जा रहे है जिसका मुकाबला आसपास के जनपदों में चमचमाते स्कूल महंगी स्कूल ड्रेस और बड़ी बड़ी स्कूल बसों में स्कूल जाने वाले छात्र नही कर पा रहे है। सेकण्डों में ये बच्चा उत्तर प्रदेश के जनपदों के नाम और स्टेट के नाम सुना देता है इस बच्चे को शमली जनपद के स्कूलों में एक प्रेरणा के तौर पर देखा जाने लगा है।

आपको बता दें कि मामला जनपद शामली के शामली ब्लॉक क्षेत्र के गांव सोंटा का है जहां के रहने वाले एक गरीब परिवार जहां के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले कक्षा 5 वी के छात्र ने उन स्कूलों को पछाड़ दिया है जिनकी चमचमाती ऊंची इमारतें हैं और अच्छी-अच्छी स्कूल बसों में बच्चे वहां पर शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाते हैं और सरकारी विद्यालय को लोग 16 भावना से देखते हैं इस बच्चे ने ऐसे लोगों के मुंह पर ताला लगाने का काम किया है जो कि मात्र 25 सेकंड में प्रदेश के सभी 75 जिलों के नाम बता देता है तो वही मात्र 10 सेकंड में सभी राज्यों के नाम भी बता देता है जहां सरकारी स्कूलों को हिना भावना से देखा जाता है और आमतौर पर खबरें आती हैं कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती बल्कि बच्चों से मजदूरी कराई जाती है लेकिन यह उन्हें स्कूलों में पढ़ने वाला एक बच्चा है जो कि हिन्न भावना से देखने वाले लोगों के मुंह पर ताला लगाने का काम कर रहा है ऐसा नहीं कि स्कूल में सिर्फ यही बचा है जो कि पढ़ाई में अच्छा है अगर बाकी और बच्चों की बात की जाए तो इस स्कूल में बाकी सभी बच्चे भी इसी तरह से पढ़ाई करते हैं।

दरअसल आपको बता दें कि मामला जनपद शामली के शामली ब्लॉक क्षेत्र के गांव सोंटा का है जहां के रहने वाले एक गरीब परिवार का बेटा विनय गाँव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता है जो कि कक्षा 5 वी का छात्र है। विनय मात्र 25 सेकंड में राज्य के सभी जिलों के नाम सुना देते हैं तो वहीं मात्र 10 सेकंड में सभी प्रदेशों के नाम बता देता है। बिना एक गरीब परिवार का बेटा है और विनय की एक छोटी बहन हिमांशी है जो कि इसी विद्यालय में कक्षा 4 में पढ़ती है विनय के पिता मजदूरी करते हैं और उसकी माता जी घर पर रहकर घर का कामकाज संभालती हैं। विनय ने उन स्कूलों को पछाड़ दिया है जिनकी चमचमाती ऊंची इमारतें हैं और अच्छी-अच्छी स्कूल बसों में बच्चे वहां पर शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाते हैं और सरकारी विद्यालयो को लोग हिन्न भावना से देखते हैं। विनय जहां इतने कम समय में राज्यों और जिलों के नाम सुना देते हैं तो वही विनय स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के लिए एक रोल मॉडल साबित हो रहे हैं। सुबह जब बच्चे स्कूल आते हैं तो स्कूल में प्रार्थना के दौरान बच्चों को विनय द्वारा परदेस और जिलों के नाम सुनाए जाते हैं और स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों द्वारा दूसरे बच्चों को भी प्रोत्साहित करने का काम किया जाता है और कहा जाता है कि विनय इतने कम समय में राज्यों और जिलों के नाम बता देते हैं आप भी इन्हीं की तरह बने और इन्हीं की तरह सीखे। इतने कम समय में राज्य और प्रदेशों के नाम बताने वाले विनय का सपना एक आईपीएस अधिकारी बनने का है। विनय की मेहनत और लगन को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि एक आईपीएस बनने का सपना एक दिन जरूर साकार होगा। ऐसा नहीं है कि पूरे स्कूल में विनय ही एकमात्र ऐसा होशियार बच्चा हो बल्कि उसकी छोटी बहन हिमांशी जो की कक्षा 4 में पढ़ती है वह भी अपने भाई की तरह होशियार है और स्कूल में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे ऐसे ही हैं जो किसी न किसी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का जौहर दिखाने का दमखम रखते हैं स्कूल के अध्यापक विकास राठी ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले क्षेत्र के पब्लिक स्कूलों के साथ उनके स्कूल के बच्चों का संवाद हुआ था जिसमें भी उनके स्कूल के कई बच्चों ने प्रथम स्थान हासिल किया था। विनय इतने कम समय में यह सब सुनाने में जहां उसकी प्रतिभा और उसकी लग्न है तो वही स्कूल में उसे शिक्षा देने वाले अध्यापकों का भी अहम योगदान है क्योंकि एक कहावत है कि हीरे की पहचान को जोहरी ही जानता है लेकिन यह भी सच्चाई है कि एक जोहरी ही हीरे को तराश कर उसे कीमती बनाता है।

स्कूल के अध्यापक विकास राठी ने बताया कि अगर मैं विषयों की बात कर तो सभी विषयों में अग्रणी बच्चा है और उसकी सीखने की क्षमता और बच्चों की अपेक्षा बहुत अधिक है और हमारे यहां पर और भी बहुत सारे अच्छे बच्चे हैं लेकिन अच्छे बच्चों में से वह और भी अच्छा बच्चा है। हमारे यहां पर मैं समझता हूं कि 50 से 60 बच्चे अभी भी ऐसे हैं जो जिलों के नाम बता देंगे। लेकिन जो कि समय थोड़ा ज्यादा लेंगे और यह जो नवचारों का प्रयोग हम सुबह प्रार्थना के समय करते हैं जिससे बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी करते हैं और जिससे बच्चे ज्यादा सीख पा रहे हैं। एक कार्यक्रम और हमारे यहां चला हुआ है बच्चों की लीडरशिप का तो उसमें हम प्रार्थना सभा में ही बच्चों को प्रार्थना स्थल पर बुलाकर उसकी लीडरशिप तैयार कर रहे हैं और प्रत्येक दिन 1 बच्चे का इंट्रोडक्शन इंग्लिश में कराया जा रहा है और क्वेश्चन कराए जाते हैं।

जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने विनय के बारे में बताया कि ग्राम सोंटा जैसा कि आपने अभी मुझे बताया है मैंने भी उससे बालक की जो प्रतिभा है और जो उसकी स्पेशल प्रतिभा है उसका जो वीडियो है वह मैंने देखा है वास्तव में बच्चा बहुत ही प्रतिभाशाली है और जो हम लोगो के सरकारी स्कूल है उसमें में भी इस तरह के प्रतिभाशाली बच्चे है हम लोग यह चाहेंगे कि आगामी जो 2 अक्टूबर है और इस तरह के जो भी राष्ट्रीय पर्व आएंगे उसमें इस तरह के पूरे जिले के जो भी प्रतिभाशाली बच्चे हैं हम लोग उनका सम्मान भी करेंगे और उनको पुरस्कृत भी करेंगे ताकि इस तरह की प्रतिभा का और विकास जनपद में हो।

33

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *