पार्टी के मुखिया अजित सिंह अपने गढ़ बागपत पहुँचे

आशीष कुमार

बागपत :— राष्ट्रीय लोकदल पार्टी….. राष्ट्रीय पार्टी जरूर है लेकिन अपनी खोई हुई जमीन को बचाने में लगातार नाकाम हो रही है…. चाहे विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव । अब ऐसे में रविवार में यानी आज जमींन तलाशने को निकले पार्टी के मुखिया अजित सिंह अपने गढ़ बागपत पहुँचे और इस दौरान जब मीडिया को उनके आने की सूचना मिली तो मीडिया के लोग भी लोकदल पार्टी के मुखिया अजीत सिंह से सवाल करने पहुँच गए लेकिन उन्हें भी शायद इस बात का अंदाज़ा नही था कि आखिर चौधरी साहब मीडिया से भी इतना खफा होंगे । जी हां चौधरी साहब से जब सवाल पूछने पत्रकार बन्धु पहुचे तो मीडिया के आगे हाथ जोड़ने लगे और कहा कि आप लोगो से तो दूरी ही अच्छी है यानी साफ है कि चौधरी अजीत सिंह को अब मीडिया से बात करने में गुरेज है। 

तस्वीरों में आप साफ तौर पर देख भी सकते है कि किस तरह मीडिया बन्धुओ के किसी भी सवाल से किस तरह बच रहे है और हाथ जोड़ रहे है कि उन्हें कोई बातचीत नही करनी मीडिया से, मीडिया से तो दूरी ही अच्छी है । अब आपको पूरा वाकया भी बता देते है दरअसल आज बागपत के बड़ौत में स्थित पार्टी कार्यलय पर चौधरी साहब अपने कार्यकर्ताओं से मीटिंग करने बड़ौत पहुचे थे इस दौरान मीडिया को उनके आने की सूचना मिली तो पत्रकार भी वहां पहुँच गए । पहले तो चौधरी साहब ने अपने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए टिप्पणी की ओर कहा कि इंदिरा गांधी ने भी करने में इन्ही की तरह कमी नही छोड़ी थी लेकिन उससे भी लोगो को छुटकारा मिल ही गया था , अब रामराज तो आ गया …. जल्द अच्छे दिन भी आएंगे । इसके बाद जब चौधरी साहब से पत्रकारों ने सवाल पूछे तो वो मीडिया के लोगो के आगे हाथ जोड़ने लगे और बोले आप लोगो से तो दूरी ही अच्छी है । इसके बाद जब पत्रकारों ने उनसे कहा कि चौधरी साहब राजनीति पर न सही आपकी पार्टी किसानों की पार्टी कही जाती है तो किसानों की बात कर लेते है लेकिन अजीत सिंह मीडिया के सवालों के जवाब देने से बचते हुए नज़र आये । दरअसल इसकी एक वजह ये भी है कि विधानसभा हो या लोकसभा चुनाव चौधरी साहब अपने गढ़ बागपत में भी अपना किला ध्वस्त होने से न बचा सके और हार का सामना करना पड़ा । लोकसभा चुनाव में तो रालोद का पूरा ही सूपड़ा साफ हो गया था इसीलिए शायद इस बार के लिए अपनी खोई हुई जमीन को तलाशने में चौधरी साहब जुट गए है लेकिन चौधरी साहब को अब मीडिया से गुरेज भी हो गया है।

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