तीर्थनगरी के प्रसिद्ध मधुबन आश्रम पर कब्जे को लेकर दो पक्षों मे भीड़त

विनीता खुराना

ऋषिकेश/

तीर्थनगरी के प्रसिद्ध मधुबन आश्रम पर कब्जे को लेकर दो पक्षों में शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप दौर, दोनों पक्षों ने जताया आश्रम पर अपना हक, वही आश्रम पक्ष ने पुलिस पर लगाया शिकायत न लिखने का आरोप।बीते रोज कुछ व्यक्तियों द्वारा संघ और भाजपा का नाम लेकर मुनिकीरेती कैलाश गेट स्थित मधुबन आश्रम पर कब्जा करने का प्रयास मामला प्रकाश में आया था, जिसके चलते कब्जा करने वाले व्यक्तियों द्वारा मुनिकीरेती थाने में आश्रम के महाराज सहित अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था, वही आश्रम द्वारा भी उक्त व्यक्तियों के खिलाफ जब थाने में शिकायत दर्ज करायी गयी तो उनकी शिकायत दर्ज नही की गयी है, जिस पर आश्रम द्वारा पुलिस पर किसी बड़े दबाव में कार्य करने का आरोप लगाया गया है।गौरतलब है बीते 14 अगस्त को स्वयं को मधुबन आश्रम का ट्रस्टी बताते हुए कुछ लोगों ने मधुवन आश्रम के अध्यक्ष परमानंद सहित कुछ सेवकों के खिलाफ मुनिकीरेती थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिस पर शनिवार को उक्त पूरे प्रकरण पर आश्रम के महाराज परमानंद ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान उन पर लगे आरोपों का खंडन करते हुए बताया कि जो लोग छह व्यक्ति स्वयं को ट्रस्टी बता कर आश्रम पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं उनको पहले ही ट्रस्ट द्वारा 22 जून 1995 को निलंबित किया जा चुका है। जिसके बाद ट्रस्ट में महज दो ट्रस्टी स्वामी भक्तियोग महाराज व राजू बजाज ही रह गए। वही उक्त व्यक्तियों में से कुछ के खिलाफ 24 सितम्बर 1997 में तत्कालीन स्वामी भक्तियोग महाराज द्वारा मुनिकीरेती थाने में स्वयं व आश्रम को उक्त निष्कासित व्यक्तियों से खतरा बताते हुए शिकायत भी की जा चुकी है।परमानंद महाराज ने बताया कि उक्त व्यक्तियों द्वारा ट्रस्ट से अपने निलंबन व भक्तियोग महाराज के खिलाफ मुंबई सिविल कोर्ट में अपील की गयी थी लेकिन निर्णय आने से पूर्व ही उक्त व्यक्तियों ने 4 अप्रैल 2012 में अपना मुकदमा वापस ले लिया गया।परमानंद महाराज ने बताया कि 12 अप्रैल 2017 को स्वामी भक्तियोग महाराज के निधन के बाद से ही उक्त निष्कासित व्यक्ति लगातार आश्रम पर कब्जा करने की नियत से विवाद में लाने के कार्य कर रहे हैं। वही परमानंद महाराज ने थाना मुनिकीरेती पुलिस की भूमिका पर भी प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि बाहर से आये कुछ व्यक्तियों द्वारा दी गयी तहरीर पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर लिया जबकि आश्रम द्वारा उक्त व्यक्तियों के खिलाफ दी जा रही शिकायत को नही लिखा जा रहा है जो खेदजनक है।साथ ही परमानंद महाराज ने यह भी बताया कि बीते कुछ रोज पूर्व आश्रम में अमित रावत नाम का परिचय देते हुए एक युवक कुछ लोगों को लेकर पहुँचा और अपने को राज्य के सत्ताधारी मुखिया का भांजा बताते हुए आश्रम खाली करने का दबाव बनाते हुए धमकाया वही उक्त युवक ने यह भी कहा कि आर0एस0एस0 (संघ) भी ऐसा ही चाहती है।मामला उजागर होने के चलते तीर्थनगरी में संघ व भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने उक्त मामले में संघ व भाजपा को बदनाम करने वालों की शिकायत राज्य के मुखिया व संघ व भाजपा के उच्चाधिकारियों को देते हुए ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।

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