प्रशासनिक अधिकारियों के औचक निरीक्षण में स्वास्थ्य सेवाएं मिली चौपट

Pankaj Kumar

शामली – जनपद शामली में आज जिलाधिकारी के निर्देश पर गुरुवार को सरकारी अस्पतालों में हुई प्रशासनिक अधिकारियों की छापेमारी ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी। शामली सीएचसी जिसे जिला अस्पताल की भी दर्जा भी प्राप्त है वहां पर तहसीलदार प्रीति सिंह ने औचक निरीक्षण किया तो तमाम अव्यवस्थाओं की पोल उनके सामने खुल गयी और जहाँ के औचक निरीक्षण में करीब 80 फीसदी डॉक्टर गायब पाये गए तो वही एसडीएम ऊन ने चौसाना पीएचसी का औचक निरीक्षण किया जहाँ अवव्यस्थाओ के साथ साथ डॉक्टरों की भी पोल खुल गयी। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए गए औचक निरीक्षण की सारी रिपोर्ट जिलाधिकारी अखिलेश सिंह को सौंपी जाएगी।

आपको बता दें कि पूरा मामला जनपद शामली का है जहां पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को जानने के लिए डीएम शामली अखिलेश सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों को अपने क्षेत्र में सीएचसी और पीएचसी पर दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का हाल जानने के लिए और चक निरीक्षण के लिए कहा था जिस के आदेशानुसार प्रशासनिक अधिकारियों ने सीएचसी और पीएचसी का निरीक्षण किया जहां पर निरीक्षण के दौरान वहां पर अवस्थाओं की पोल तो खुली ही साथ ही डॉक्टरों की भी पोल खुलती हुई नजर आई दर्शन तहसीलदार प्रीति सिंह ने शामली सीएचसी का निरीक्षण किया जो कि जिला अस्पताल की तर्ज पर चलाई जा रही है वहां पर प्रीति सिंह ने देखा कि हर जगह अव्यवस्था फैली हुई है तो वही 80 फ़ीसदी के करीब डॉक्टर अपनी ड्यूटी से नदारद हैं

पूरे सीएचसी का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार की तो वही दूसरी ओर एसडीएम सुरेंद्र सिंह चाहल ने जोशना के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया जहां पर उन्होंने पीएचसी में तमाम तरह की व्यवस्थाएं देखी तो वहीं पर भारी डॉक्टर विकास रजिस्टर में हाजिरी लगकर कटी हुई मिली बताया जा रहा है कि सीएचसी प्रभारी कल ही अगले दिन की हाजरी लगा कर गए थे और और चक निरीक्षण की भनक लगते ही उन्होंने फार्म स्ट पर दबाव बनाकर हाजिरी को कटवा दिया था वहां मौजूद मरीजों ने डॉक्टर विकास पर अधिकांश छुट्टी पर रहने का आरोप भी लगा है चौसा ना पीएचसी का निरीक्षण करने के बाद एसडीएम झिंझाना सीएचसी पर पहुंचे तो वहां पर सीएचसी प्रभारी डॉ लेख राम के साथ-साथ कई अन्य डॉक्टर भी गैर हाजिर मिले दोनों जगहों पर हुए और चक निरीक्षण की दोनों ही प्रशासनिक अधिकारियों ने रिपोर्ट तैयार कर ली है जो कि जिलाधिकारी महोदय को सौंपी जाएगी अब देखने वाली बात यह होगी कि जिलाधिकारी अखिलेश सिंह द्वारा लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों पर आखिर क्या कार्रवाई की जाती है।

प्रदेश सरकार जहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए तमाम तरह की योजनाएं चला रही है। वही सरकारी कर्मचारी उनकी योजनाओं पर पलीता लगाने में लगे हुए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में अव्यवस्थाओं का मिलना व डॉक्टरों का ड्यूटी से नदारद होना इस बात की ओर इशारा करता है कि डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी के प्रति सजग नहीं है और अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरत रहे हैं। अब ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि आखिर मरीजों को जब अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं मिलेंगे तो उनका इलाज आखिर कैसे होगा। अब ऐसे लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों पर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की तरफ से क्या कार्रवाई की जाती है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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