डीएम के आदेश पर एसडीएम ने किया रिश्वत लेखपाल को निलंबित

धामपुर /बिजनोर

धामपुर तहसील के लेखपाल अंजलि त्यागी हाफिजाबाद क्षेत्र की तैनात है जिसकी रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल हो रही थी इसी के चलते डीएम के आदेश पर एसडीएम ने किया निलंबित और जांच के दियेआदेशधामपुर तहसील में तैनात लेखपाल का रिश्वत लेते वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया में वायरल हो गया। वायरल वीडियो के अनुसार लेखपाल तहसील परिसर के कमप्यूटर कक्ष के बाहर खड़ी है। उसके पास तीन किसान खड़े हुए हैं। वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि महिला लेखपाल एक किसान से 100-100 के नोट खुलेआम ले रही है, वीडियो में पहली आवाज आती है कि मैं आपको पहले बता चुकी हुं बार-बार परेशान मत करो मुझे काम करने दो, किसान कम रुपये देने कि कोशिश करता है तो लेखपाल कह रही हैं कि अब कुछ नहीं होगा पहले हि रियायत कर चुकी हूं। उसके बाद साइड में खड़ा किसान 100-100 के नोट दे रहा है। मौहतरमा लेखपाल कह रहीं है कि कितने रुपये हैं, कम रुपये बताकर लेखपाल लौटाने का प्रयास करती नजर आ रही है। और कह रही है कि साड़े सात सौ रुपये चाहिये। वीडियो में दूसरी आवाज आती है कि बाकी पैसे का हिसाब कर देंगे, यह सुनकर लेखपाल 100-100 के नोटो को कागज की आड़ में रखकर गिनना शुरु कर देती है। और फ़िर उन नोटो को अपने हाथ में पकड़कर गले में पड़े दुपट्टे कि आड़ लेती नजर आ रही है। और बकाया रुपये चुकाने के लिये सख्त हिदायत देती नजर आ रही हैं।इससे पहले कि डीएम बिजनौर ने दो लेखपाल भाई बहन का वीडियो रिश्वत लेते देख वायरल होने पर सस्पेंड भी कर दिया है। तभी से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। बावजूद इसके यह महिला लेखपाल सीएम योगी व डीएम बिजनौर के आदेशो को ठेंगा दिखाकर खुलेआम रिश्वत ले रही है और किसानो को धमकाकर और पैसे लाने कि हिदायत भी दे रही है।गरीब व छोटे किसान डर कि वजह से आवाज बुलंद नहीं कर पाते जिस कारण तहसील में अन्य लेखपाल भी किसानो से खसरा खतौनी हिस्सा प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र व विरासत के नाम हजारो रुपये तक वसूलने में कामयाब हो जाते है। अधिकतर लेखपाल व कानूनगो ने अपने साथ निजी कार्यकर्ता रखे हुए हैं। जो काली कमाई करने में माहिर होते हैं। किसानो व ग्रामीणो से कागजो पर तहसीलदार, लेखपाल, कानूनगो कि रिपोर्ट लगवाने के नाम पर रुपये वसूलते हैं। साथ हि उनसे तहसील के चक्कर कटवाये जाते हैं। किसान व ग्रामीण थक हारकर लेखपाल व कानूनगो के निजी सचिव को रुपये दे आते हैं। जिसके बाद कागज पर कार्यवाही कि जाती है। सूत्रो के अनुसार यह पैसा उच्चाधिकारियो तक जाता है। जिस कारण उच्चाधिकारी अपने निचले स्तर के अधिकारियो के विरुद्द कार्यवाही नहीं कर पाते। जनता ने अपने वोट के अधिकार से एक स्वच्छ व ईमानदार सरकार चुनी थी।लेकिन यह सरकार जनता के वादो पर खरी उतरती नजर नहीं आ रही है।रिपोर्ट अमित कुमार रवि

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