पंचायत के अधिकारों पर सरकार कर रही कुठाराघात

बागेश्वर – पंचायत जन अधिकार मंच के तत्वावधान में बागेश्वर इकाई की बैठक में पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने को लेकर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि मंच के प्रदेश संयोजक जोत सिंह बिष्ट ने कहा 73वें संविधान संशोधन में पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की मंशा को नरसिम्हा राव सरकार ने कानून बनाकर 1993 में लागू किया था। अब राज्य सरकार पंचायतों के अधिकारों पर कुठाराघात कर रही है। दूर-दराज से आए पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी बात बेबाकी से बात रखी। शुक्रवार को जिला पंचायत सभागार में बिष्ट ने कहा कि आज सरकार विधायिका, अधिकारी, कर्मचारी और पंचायत प्रतिनिधियों को कुछ नहीं समझ रही है। पंचायतों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर लोकत्रंत का गला घोट रही है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों में बच्चों की संख्या तथा शिक्षा की अनिवार्यता के वे पक्षधर हैं, लेकिन जो लोग इस कानून को बनाकर लागू कर रहे हैं क्या उनका शिक्षित होना जरूरी नहीं है ? विशिष्ट अतिथि मुख्य समन्वयक मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि पंचायत राज अधिनियम में संशोधन के माध्यम से सरकार और अधिकारी मिलकर पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार मिल सके, इसके लिए लंबी लड़ाई लडऩे की कार्य योजना बनाई जा रही है। अध्यक्षता करते हुए मंच के जिला संयोजक व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने कहा कि राज्य में पंचायतों की उपेक्षा की जा रही है। जन अधिकार मंच के बैनर तले जारी लड़ाई को और अधिक मजबूत किया जाएगा। इस लड़ाई को सडक़ों ने लेकर न्याय पालिका तक लड़ा जाएगा और पंचायतों को और अधिक मजबूत किया जाएगा। इस दौरान तीन और इससे अधिक बार ग्राम प्रधान रहे लोगों को सम्मानित किया गया। सभा को पूर्व दर्जा धारी राजेंद्र सिंह टंगडिय़ा, नगर पंचायत कपकोट के अध्यक्ष गोविंद बिष्ट, पूर्व पालिकाध्यक्ष गीता रावल तथा ब्लॉक प्रमुख गोपा धपोला ने संबोधित किया। यहां जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवेंद्र परिहार, नरेंद्र बघरी, दीपक कांडपाल, महिमन गडिय़ा, सुंदर सिंह मेहरा, चामू सिंह देवली और भागीरथी देवी समेत 85 पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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