हिंसा का जबाव हिंसा से दो

मार्च की क्रांति के बाद मार्क्स कोलोन चले गए और वहां उन्होंने न्यू राई निश जाई टूंग अखबार की स्थापना की यह अखबार 1जून1848 से 19 मई 1849 तक प्रकाशित हुआ ।यह एक मात्र एसा पत्र था जो उस समय के जनवादी आंदोलन के अंदर सर्वहारा दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता था जैसा कि जून 1848 के पेरिस विद्रोह की उसकी खुली हिमायत से साबित होता है अखबार के सभी हिस्सेदार इसी कारण अलग हो गए थे  एक दूसरे अखबार ने मार्क्स के अखबार के खिलाफ लिखा की मार्क्स सम्राट ओर राज्य के वाइस रीजेंट से लेकर पुलिस के सिपाही तक पवित्र पदो पर बैठे लोगों के खिलाफ लिखता है ओर वह भी प्रशासन के दुर्ग में बैठकर वहा 8000 सिपाहियो का गेरिस्न मौजूद है  । परन्तु इतनी हिम्मत करके लिखना भी बेकार गया क्योंकि राइनी उदारपंथी भी जो अखबार के समर्थक थे वो भी गुस्सा हो गए पर यह गुस्सा बेकार गया क्योंकि एक लंबे समय के लिए अख़बार को बंद कर दिया गया फ्रैंकफुर्ट स्थितजर्मन राज्य का न्याय मंत्रालय पत्र के कितने ही लेखो पर आपत्ति प्रकट करते हुए कोलोन के सरकारी को लिखता रहा ताकि पत्र के खिलाफ  क़ानूनी कार्यवाही की जा सके / पर वह भी व्यर्थ  गया क्योकि पुलिस की आखो के सामने ही अख़बार बड़े मजे से सम्पादित और मुद्रित होता रहा /सरकार और पूंजीपतियों पर उसके आक्षेपों की तीरवता के साथ उसकी प्रतिष्ठा और बिक्री भी बढ़ती गई / नवंबर में जब प्रशा में तख्ता पलट हुआ  तो अख़बार ने हर एक के मुख्य पेज पर प्रकाशित   जनता से अपील में लिखा  की टेक्स मत दो और हिंसा का जबाब हिंसा से दो १८४९ के बसंत में इस कारण और एक दूसरे लेख के कारण भी जूरी के सामने उस पर मुकदमा चला ,लेकिन वह दोनों बार अपराध मुक्त करार दिया गया/  अंत में १८४९ में जब विद्रोह  दबा दिए  गए और काफी बड़े सैन्य दलों को इकट्ठा कर और उनकी लामबंदी कर बाडेन-फाल्ज विद्रोह के विरुद्ध परसियाई अभियान शुरू किया गया / तब सरकार को यकीन हो गया की वह अब इतनी मजबूत हो गई है की अख़बार को जबरन दबा सके उसका अंतिम अक लाल श्याही में प्रकाशित हुआ था और मार्क्स को मजबूरन फ़्रांस को छोड़ कर लन्दन जाना पड़ा /
22

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *