किसानो की समस्या का समाधान करने वाली ज्वालापुर गन्ना सहकारी समिति खुद बीमार

हरिद्वार – गन्ना किसानों के सहयोग के लिए 1990-91 में बनी ज्वालापुर गन्ना सहकारी समिति का अस्तित्व खतरे में है। आसपास क्षेत्र के लगभग 9656 किसानों के अंशदान के सहयोग से संचालित समिति के पास बजट का अभाव है। समिति का वित्त वर्ष 2012 से आज तक लगभग 5.50 करोड़ रुपये के शेयर की रकम लक्सर, इकबालपुर, लिब्बरहेड़ी और डोईवाला चीनी मिलों पर बकाया चल रहा है। गन्ना किसानों को बेहतर खाद, बीज, दवाइयां और गन्ना खरीद का प्रबंध तथा अन्य कृषि संसाधनों की व्यवस्था कराने का जिम्मा गन्ना सहकारी समिति के ऊपर है। इसके एवज में गन्ना किसानों का लगभग 3 रुपये प्रति कुंतल पैसा गन्ना सहकारी समिति को जाता है जो चीनी मिलों के पास लंबित पड़ा है। राज्य सरकार ने भी 2013-14 का लगभग 1.59 करोड़ रुपये का भुगतान गन्ना समिति को नहीं किया। जिसके चलते किसानों को मिलने वाले संसाधन और सुविधाएं प्रभावित होनी शुरू हो गई है। बजट के अभाव में समिति के रिटायर कर्मचारियों को भी पैसा नहीं मिल पाया। वहीं, भवन आदि की मरम्मत और अन्य व्यवस्थाओं के लिए भी समिति के पास बजट नहीं है। गन्ना किसान रघुवीर सिंह, सर्वजीत सिह, कश्मीर सिंह, तेजेन्द्र सिंह, अमरजीत, गुरदेव सिंह, बाबूराम, परमजीत सिंह आदि का कहना है कि अव्यवस्थाओं के चलते सही समय पर किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं, गन्ना सहकारी समिति ज्वालापुर के सचिव अशोक कुमार ने बताया कि समिति का लगभग 5.50 करोड़ रुपये का अंश (शेयर) चीनी मिलों पर और राज्य सरकार के पास लगभग 1.59 करोड़ रुपये लंबित है। बार-बार आग्रह करने पर भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। बजट के अभाव में गन्ना किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराने में मुश्किलें आ रही हैं। रिटायर्ड कर्मचारियों को वेतन और ग्रेच्युटी आदि का भुगतान आज तक नहीं दिया जा सका है।

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