अस्पताल के बद्तमीज सीएमएस को मांगनी पड़ी बदतमीजी की माफ़ी – रोजाना आती रहती है बदतमीजी की शिकायत – आज पड़ गई भारी

हरिओम गिरी/ रूड़की

रूड़की – सिविल अस्पताल के सीएमएस डी के चक्रपाणि को एक पत्रकार के साथ बदतमीजी करना भारी पड़ गया काफी हंगामे के बाद बद्तमीज सीएमएस को पत्रकारों के सामने आकर उनसे माफ़ी मांगनी पड़ी है और आगे भविष्य में कभी भी पत्रकारों से इस तरह की बदतमीजी नहीं करने की बात कही है !

आज सुबह सिविल अस्पताल में काफी संख्या में दूर-दूर से मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे थे जब अस्पताल में उनकी तकलीफो के बारे में सुनवाई नहीं हो रही थी तो उन्होंने पत्रकारों को फोन करना शुरू किया उनकी बात सुनकर एक पत्रकार अस्पताल में न्यूज़ कवर करने के लिए पहुंचा तो अस्पताल के सीएमएस डी के चक्रपाणि  भी वहां पहुंच गए और पत्रकार और मरीज दोनों से बदतमीजी और धक्कामुक्की करने के साथ ही सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के जुर्म में जेल में डलवाने की धमकी देने लगे पत्रकार चुपचाप सबकुछ सह कर वहाँ से अलग हो गया जिसके बाद पत्रकार ने अपने पत्रकार साथियो को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी कुछ देर बाद ही अस्पताल में काफी संख्या में पत्रकार पहुँच गए और घटना की शिकायत ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल से भी कर दी गई इसके बाद सभी पत्रकार सीएमएस के ऑफिस के बाहर धरने पर बैठ गए !

पत्रकार के साथ सीएमएस के द्वारा की गई बदतमीजी की सुचना भाजपा के कार्यकर्ताओ को लगी तो वो भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुँच गए सीएमएस से पत्रकार से बदतमीजी करने का कारण पूछने लगे तभी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट भी अस्पताल पहुँच गई घटना की जानकारी पुलिस को लगी तो कुछ ही देर में गंगनहर कोतवाल राजेश शाह भी अस्पताल पहुँच गए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने सीएमएस से घटना की जानकारी ली तो गलती सीएमएस की निकली जिसके बाद कार्यवाही के डर से सीएमएस तुरंत ही पत्रकारों से माफ़ी मांगने को तैयार हो गए एक कर्मचारी द्वारा धरने पर बैठे पत्रकारों को सीएमएस ऑफिस आने के लिए कहा गया लेकिन पत्रकारों ने मना कर दिया जिसके बाद सीएमएस गंगनहर कोतवाल और भाजपा कार्यकर्ताओ के साथ पत्रकारों के बीच आये और अपने द्वारा की गई बदतमीजी की माफ़ी मांगी और भविष्य में फिर कभी पत्रकार के साथ बदतमीजी नहीं करने की बात कही है !

सीएमएस डी के चक्रपाणि के द्वारा बदतमीजी की यह घटना पहली नहीं है बल्कि उनके खिलाफ ऐसी घटनाओ की बहुत लम्बी लिस्ट है कभी वह एएसडीएम से भिड़ जाते है तो कभी पुलिसकर्मियों से बदतमीजी करने लगते है कभी वो उपचार कराने आये मरीजों पर चांटे बरसा देते है तो कभी पत्रकारों के साथ बदतमीजी करते रहते है कई बार हालात यहाँ तक पहुँच गए है की मरीज के तीमारदार उनके ऑफिस में घुसकर तोड़फोड़ करने को मजबूर हो जाते है इतना सबकुछ सिर्फ इन्ही सीएमएस के कार्यकाल में संभव हो चूका है इससे पहले सिविल अस्पताल के कभी किसी भी बात को लेकर विवाद नहीं हुआ है !

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