श्रीपंचायती अखाड़ा निर्मल की पांच हजार करोड़ की संपत्ति को लेकर अखाड़े में दरार

हरिद्वार-कनखल स्थित श्रीपंचायती अखाड़ा निर्मल की पांच हजार करोड़ की संपत्ति को लेकर अखाड़े में दो फाड़ हो गए हैं। दोनों पक्ष आरोप प्रत्यारोप लगाकर आमने सामने आ गए हैं। मामला संपत्ति से जुड़ा हुआ ही है, लेकिन दोनों ही पक्ष अखाड़े की संपत्ति को बचाने का दावा कर रहे हैं। रविवार को दोनों पक्षों ने प्रेस वार्ता कर अपना अपना पक्ष रखा है। बीते दस दिन से पथरी एक्कड़ कलां स्थित श्रीपंचायती अखाड़ा निर्मल के डेरे को लेकर विवाद चल रहा है। एक्कडक़लां स्थित डेरे के मुकामी महंत को लेकर विवाद है। अपने आप को मुकामी महंत बताने वाले बाबा प्रेम गिरी डेरे पर बीते कुछ माह से काबिज है। पूर्व से इसी डेरे पर महंत बलवंत सिंह काबिज थे। बलवंत सिंह के बाद देखरेख के लिए बाबा प्रेम गिरी को बैठाया गया था। अखाड़े के अध्यक्ष होने का दावा करने वाले महंत ज्ञानदेव सिंह ने बीते दिनों प्रेम गिरी को हटाकर किसी अन्य महंत को मुकामी महंत बनाने का आदेश दे दिया। पथरी के लोगों ने प्रेम गिरी को हटाने जाने का विरोध शुरू किया था। विवाद बड़ा तो डेरे में पीएसी को तैनात करना पड़ा। अब दोनों पक्ष आमने सामने आ गए हैं। प्रेम गिरी के पक्ष में सर्वभारत निर्मल महामंडल के सचिव महंत हाकम सिंह और जनरल कमेटी के कुछ सदस्य आ गए हैं। रविवार को हाकम सिंह ने प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर आरोप लगाया कि महंत ज्ञानदेव सिंह संस्था की जमीन को खुर्दबुर्द कर रहे हैं। हाकम सिंह ने दावा कि ज्ञानदेव सिंह अखाड़े के अध्यक्ष ही नहीं है, उनको 26 अक्तूबर वर्ष 2017 में जनरल कमेटी ने हटा दिया था। उसके बाद अखाड़े की देखरेख को चार सदस्यों की कमेटी बनाई गई थी। आरोप लगाया कि ज्ञानदेव के खिलाफ कुरुक्षेत्र में भी धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ है। आरोप लगाने के बाद महंत ज्ञानदेव की ओर से अखाड़े के कोठारी महंत जसविंदर सिंह शास्त्री ने अखाड़े में पत्रकार वार्ता कर अपना पक्ष रखा। कोठारी महंत जसविंदर सिंह शास्त्री का कहना है कि महंत ज्ञानदेव ही अखाड़े के अध्यक्ष हैं। जनरल कमेटी या फिर किसी अन्य कमेटी के पास अध्यक्ष को हटाने का कोई भी अधिकार नहीं है। महंत ज्ञानदेव सिंह ने आरोप लगाया कि एक बड़ा संत दूसरे गुट के पीछे लगा है जो अखाड़े की भूमियों पर कब्जा कर उनको बेचने का काम कर रहा है। बता दें कि अखाड़े की हरिद्वार के अलावा पंजाब, कुरुक्षेत्र, समेत देश के कई हिस्सों में करीब पांच हजार करोड़ की संपत्ति है। जिसको लेकर विवाद चल रहा है।

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