महान स्वतन्त्रता सेनानी व गुर्जर गोरव विजय सिंह पथिक को विनम्र श्रद्धांजलि

विजय सिंह पथिक का जन्म उत्तर प्रदेश बुलंदशहर जिले के ग्राम गुढावली कलां के एक गुर्जर परिवार में हुआ था। उनके दादा इन्द्र सिंह थे । जो बुलन्दशहर जिले के मालागढ रियासत के दीवान थे। वे बहुत ही साहसी व्यक्ति थे। जिन्होने देश के स्वतन्त्रता संग्राम में अग्रेजो के साथ लडाई की और वीरगति को प्राप्त हुए। पथिक भी अपने पिता की तरह एक वीर और साहसी थें। पथिक के पिता हमीर सिंह गुर्जर को भी क्रान्ति में भाग लेने पर अग्रेजी सरकार के गिरफ्तार किया था।
पथिक की मां कमल कुमारी और उनके परिवार का क्रान्तिकारी व देशभक्ति से परिपूर्ण पृष्ठभूमि से गहरा सम्बन्ध है। जब पथिक यूवा हुए तो उनका सम्पर्क ‘ रामबिहारी बोस और शचन्द्रि नाथ मान्थाल ‘ क्रान्तिकारीयो में हो गया था।

पथिक का असली नाम भूपसिंह गुर्जर था जो 1915 के लाहौर पडयन्त्र के बाद उन्होने अपना नाम बदलकर विजय सिंह पथिक रख लिया। जब मोहनचन्द करमचंद गांधी का सत्याग्रह आन्दोलन चला उससे पहले ही उन्होने बिजौलिया किसान आंदोलन के नाम से किसानो में स्वन्त्रता के प्रति अलेख जगाने को काम किया।

बिजौलिया किसान आन्दोलन – विजय सिंह पथिक ने अपने साथियो के साथ 1920 में नागपुर अधिवेशन में शामिल हुए बिजौलियो के किसानो की दुर्दशा और देशी राजाओ की निरंकुशता को दर्शाती हुई एक प्रदर्शनी का आयोजन किया। गाधी जी सामा्रज्यवाद सामंतवाद का ही एक स्तम्भ है। गांधी जी न अहमदावाद अधिवेशन में किसानो को (क्षेत्र होड देने) की सलाह दी, पथिक जी ने राजस्थान सेवा संघ के माध्यम से बेगु, पारसोली,मिन्दरवासी और उदयपुर में शक्तिशाली आन्दोलन किए। किसानो की विजय बिजौलिया आन्दोलन अन्य क्षेत्र के किसानो के लिए प्ररेणा स्त्रोत बन गया था। और राजस्थान में किसान आन्दोलन की लहर चल पडी थी । इससे ब्रिटिश सरकार डर गई थी। अंतत सरकार ने राजस्थान के ए.जी.जी हालैण्ड को बिजौलिया किसान पंचायत बोर्ड और राजस्थान सेवा संघ से बातचीत करने के लिए नियुक्त किया।

साहित्यिक जीवन – पथिक जी एक अच्छे लेखक, कवि व पत्रकार भी थे। इन्होने राजस्थान संदेश नाम से अखबार भी निकाले थे । ये पूरे राजस्थान में राष्ट्रीय पथिक के नाम से अधिक लोकप्रिय हुए। उनकी पुस्तके – अजय मेरू उपन्यास , पथिक प्रमोद ( कहानी सग्रह) पथिक जी के जेल के पत्र व कविता संग्रह में उपस्थित है।

पथिक का विवाह – इन्होने 1930 में एक अहोड आपू कर विधवा अध्यापिका से विवाह कर ग्रहस्थ जीवन की शुरूआत की। शादी के एक माह बाद उन्हे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी पत्नि टयूशन पढाकर धर खर्च चलाती थी।

पथिक का निधन – पथिक जी ने जीवनपर्यन्त निस्वार्थ सेवा भाव से देश सेवा में जुटे रहे। भारत मां के इस महान सपुत्र ने 28 मई 1954 में चिर निन्द्र्रा में सो गये। पथिक जी की देशभक्ति निस्वार्थ थी। जब वह मरे उनके पास सम्पत्ति के नाम पर कुछ नही था। जबकि वो राजपुताना और मध्यभारत के काग्रेस अध्यक्ष रहे। इस देश में किसान आन्दोलन के जनक कहे जाते है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवचरण माथूर ने पथिक जी का वर्णन राज्स्थान की जाग्रति के अग्रदुुत महान क्रान्तिकारी के रूप् में किया । ऐसे महान व्यक्तित्व के स्वामी पथिक जी के लिए गुर्जर समाज और किसान हमेशा गौरवातिंत महसुस करता है।

खटाना बुलेटिन ऐसे महान पुरूष को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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