चीनी मिल की ओर से नहीं हुआ पिछले साल का बकाया 72 करोड़ रुपये का भुगतान

रुडक़ी – इकबालपुर चीनी मिल से जुड़े 17 हजार गन्ना किसानों का पिछले साल का भुगतान अटक गया है। चीनी मिल को अभी तक न तो सॉफ्ट लोन मिला है और न ही रिसीवर। पिछले साल की चीनी को बिकवाकर किसानों का भुगतान दिलाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हर किसी का जोर नये साल के भुगतान पर ही है। इकबालपुर चीनी मिल ने स्थानीय किसानों की परेशानी को बढ़ा दिया है। अभी तक चीनी मिल की ओर से पिछले साल के बकाया 72 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया है। चीनी मिल बार-बार सॉफ्ट लोन होने की बात कह रही है लेकिन सॉफ्ट लोन को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। जबकि जिले की दूसरी निजी चीनी मिलों लक्सर और लिब्बरहेड़ी का सॉफ्ट लोन पहले ही हो चुका है। दोनों चीनी मिलों की ओर से किसानों का पिछले सत्र का शत-प्रतिशत भुगतान भी कर दिया गया है। इकबालपुर चीनी मिल प्रबंधन से बकाया भुगतान की जानकारी लेने जा रहे किसानों को बस एक ही जवाब दिया जा रहा है कि उत्तराखंड सहकारी बैंक ने ऋण को स्वीकृति दे दी है। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक भी जल्द स्वीकृति दे देगा। किसान नेता चौधरी कटार सिंह, विजयपाल सिंह आदि ने आरोप लगाया कि रिसीवर भी किसानों के गन्ने का भुगतान दिलाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुए हैं। एक सप्ताह रिसीवर की ओर से बैठक की जा रही है, लेकिन भुगतान को लेकर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। किसान परेशान हैं, अब उनके पास सिवाय आंदोलन के दूसरा रास्ता नहीं बचा है। इस संबंध में रिसीवर संतोष कुमार पांडे ने बताया कि इस बारे में चीनी मिल को चेतावनी दी गई है। 26 मई तक 10 करोड़ रुपये देने की बात चीनी मिल ने कही है। यदि सॉफ्ट लोन नहीं होता है तो चीनी की नीलामी कराकर किसानों के गन्ने का भुगतान कराया जाएगा।

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