श्रीमद्भागवत कथा जीवन को जीने की कला सिखाती है

हरिद्वार – कथा व्यास महामंडलेश्वर जगदीशदास उदासीन ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जीवन को जीने की कला सिखाती है। धर्म, संस्कृति व शास्त्र का मार्ग भी प्रशस्त करती है। श्रीमद्भागवत कथा भगवान की कथाओं में सबसे अदभुत ग्रंथ है, जिसमें सभी धर्म, शास्त्रों का सार समाहित है। मनुष्य को अपने जीवन में कभी छल, कपट का सहारा नहीं लेना चाहिए। सत्य के मार्ग पर चलने वाले मनुष्य को कष्ट तो जरूर होते हैं, लेकिन जीवन आनंदमय हो जाता है। महंत कमलदास महाराज के सयोजन में आयोजित अष्टम वार्षिकोत्सव के पावन अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का संचालन करते हुए महामंडलेश्वर हरिचेतनानन्द ने कहा कि मां गंगा के पावन तट पर श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से जीवन भवसागर से पार हो जाता है। इससे पहले बाबा रामदेव ने कहा कि भगवान ने जीवन में घास से लेकर अणु-परमाणु, ज्ञान-विज्ञान सबकुछ जीवन में संजोया है लेकिन अज्ञानवश मनुष्य अपने आप को अधूरा समझकर किसी ओर व्यक्ति को अपना अधूरापन समाप्त करने के लिए तलाशता रहता है, जबकि जीवन भगवान की सबसे बड़ी संरचना है। कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को पूर्ण नहीं कर सकता, जबकि हम अपने जीवन को स्वयं ही पूर्ण बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को धर्म और संस्कृति में पिरोने का काम श्रीमद्भागवत कथा द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन के कोठारी महंत प्रेमदास, सेवादास, अमरदास, सवज्ञामुनि, कृपालदास, जयन्त मुनि, निर्मलराम मुनि, महंत केशवनन्द, अर्जुनदास, जमनादास, धर्मपाल नम्बरदार, कन्हैयालाल पंवार, विजेन्द्र सिंह डागर, महेन्द्र सिंह डागर, आजाद सिंह डागर, चतर सिंह, पार्षद अनिल मिश्रा आदि शामिल थे।

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