लाईओवर से जुडक़र वाई-शेप में बनकर तैयार नया फ्लाईओवर बना डेंजर जोन

देहरादून – दून में यातायात सुधार की परियोजनाओं के निर्माण में तकनीकी अपरिपक्वता कब दूर हो पाएगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। हमारे अधिकारी एक मुश्किल का हल निकालते हैं तो उससे दूसरी मुश्किल खड़ी हो जाती है। शुरुआत करते हैं आइएसबीटी फ्लाईओवर से। आइएसबीटी फ्लाईओवर के ऊपर वाहन जितनी सुगमता से फर्राटे भरते हैं, उसके नीचे की सर्विस रोड पर उतना ही दम फूल जाता है। इसकी वजह यह कि सर्विस रोड के बड़े हिस्से पर जरूरत से अधिक चौड़े फुटपाथ बना दिए गए हैं और जो शेष भाग बचा है उसकी चौड़ाई इतनी नहीं कि वाहन यहां पर से आराम से गुजर पाएं। ऐसा नहीं है कि फुटपाथ का प्रयोग लोग ही कर रहे हैं, बल्कि उससे कहीं अधिक इन पर बाजार सजे रहते हैं।
यदि यहां पर फुटपाथ की चौड़ाई घटा दी जाती तो वाहनों के गुजरने के लिए थोड़ा जगह और मिल जाती। ऐसा जरूर होता यदि अधिकारी अपनी पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर व्यवाहिरकता के आधार पर तय कर पाते कि आइएसबीटी से सटे इस व्यस्ततम क्षेत्र में सर्विस रोड की चौड़ाई को अधिकतम कैसे किया जाए। ऐसे बेढंगे फुटपाथ को बनाने से बेहतर तो यह होता कि इसकी ऊंचाई सडक़ के बराबर ही रखी जाती, ताकि जरूरत पडऩे पर वाहनों को कम से कम अतिरिक्त चौड़ाई तो मिल ही जाती। यह सब इसलिए भी किया जाना जरूरी था कि दोनों फ्लाईओवर की सर्विस रोड से दुकानें भी सटी हैं और इन सब बातों को ध्यान में रखकर ही परियोजना का निर्माण किया जाना चाहिए था।
आइएसबीटी पर पुराने फ्लाईओवर से जुडक़र वाई-शेप में बनकर लगभग तैयार हो चुका नया फ्लाईओवर डेंजर जोन बन सकता है। क्योंकि इसे वन-वे ट्रैफिक के लिए तैयार किया जा रहा है, जबकि सुरक्षा के पुख्ता उपाय किए बिना इस पर दोतरफा ट्रैफिक चलने की आशंका है। यदि ऐसा हुआ तो यहां पर भी बल्लीवाला की तरह हादसे हो सकते हैं। फ्लाईओवर का काम अंतिम चरण में है और कार्यदायी संस्था राष्ट्रीय राजमार्ग खंड देहरादून इस माह के अंत तक इस पर वाहनों का संचालन शुरू कर सकता है। योजना के मुताबिक यह डबल लेन फ्लाईओवर वन-वे रहेगा और इस पर रिस्पना पुल की तरफ से (हरिद्वार बाईपास रोड) सहारनपुर की तरफ जाने वाले वाहनों को गुजारा जाएगा। यहां तक तो सब कुछ ठीक है और यातायात के लिहाजा से उपयोगी भी। दिक्कत सिर्फ यह है कि पुराने फ्लाईओवर के जिस भाग पर यह जुड़ रहा है, उस लेन पर देहरादून से सहारनपुर की तरफ जाने वाले वाहन गुजरते हैं। बहुत संभव है कि वह वाहन चालक इसी भाग से वाई-शेप वाले फ्लाईओवर से होकर हरिद्वार बाईपास रोड की तरफ जाने का प्रयास करें। ऐसी आशंका इसलिए भी है कि इन वाहनों को दूसरी तरफ जाने से रोकने के लिए अभी तक पुख्ता इंतजाम नहीं हो पाए हैं और लेफ्ट-टर्न होने के चलते वाहन चालक इसका प्रयोग करने से परहेज भी नहीं करेंगे। राजमार्ग खंड के अधिशासी अभियंता जेएस रावत भी इस आशंका से इन्कार नहीं कर रहे। उनका कहना है दोनों फ्लाईओवर को जोडऩे वाले हिस्से पर फाइबर वाले डिवाइडर लगाए जाएंगे और साइन बोर्ड के माध्यम से भी इसके वन-वे होने की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। हालांकि, तकनीकी रूप से भी इस हिस्से को इस तरह बनाया गया है कि वाहन चालकों को यहां पर लेफ्ट-टर्न फ्री होने जैसा अहसास न हो।

31

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *