भाजपा संग कांग्रेस भी मायावती के निशाने पर

रुडकी – सपा के साथ गठबंधन कर लोकसभा चुनाव लड़ रही मायावती के निशाने पर भाजपा के साथ कांग्रेस भी है। सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा विरोधी वोटों को बसपा के पक्ष में लामबंद करने की रणनीति के तहत मायावती खास रणनीती के तहत कांग्रेस की नीतियों की आलोचना कर रही है।उत्तराखंड में मायवती की पहली चुनावी रैली में सरकार के कामकाज को लेकर जितना भाजपा बसपा सुप्रीमो के निशाने पर रही उतनी ही कांग्रेस भी। सरकारों की नीतियों को लेकर उन्होंने जब भी भाजपा पर निशाना साधा तो कांग्रेस भी सीधे तौर पर आलोचना की। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरने के लिए उन्होंने राफेल सौदे का जिक्र किया तो बोफोर्स का मुद्दा भी उठाया। रक्षा सौदों के कथित भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा-कांग्रेस राफेल-बोफोर्स का एक-दूसरे के खिलाफ उपयोग करते हैं। भाजपा के साथ ही मायावती ने आरएसएस का भी नाम लिया। परंपरागत वोट बैंक के साथ ही उनकी नजर दूसरे वर्गों पर भी रही। भाजपा को जुमलेबाज पार्टी बताया तो कांग्रेस को भी हवा-हवाई बातें करने वाला करार दिया। जिस न्यूनतम आय योजना को घोषणा पत्र में शामिल कर कांग्रेस बड़े वोट बैंक को अपने पक्ष में साधने की कोशिश कर रही है वह ही मायावती के निशाने पर आ गया। इसकी जगह मायावती ने सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में स्थाई रोजगार का विकल्प सुझाया। गरीब, दलित, आदिवासी, ओबीसी, धार्मिक तौर पर पिछड़े अन्य अल्संख्यकों, सवर्ण जाति के गरीबों का भी कई बार जिक्र कर मायावती ने सर्वजन हिताय की बात कही। हालांकि, भाजपा और कांग्रेस सरकार के कामकाज की आलोचना के दौरान उन्होंने राहुल गांधी या कांग्रेस के किसी प्रधानमंत्री का नाम नहीं लिया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम तीन बार लिया। सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा विरोधी वोटों को अपने पक्ष में मायावती लामबंद करना चाहती है। भाजपा के साथ उनकी सियासी लड़ाई कांग्रेस से भी है। इसलिए वह कांग्रेस की भी मुखर आलोचना कर रही हैं। जिससे भाजपा विरोधी वोट कांग्रेस में जाने के बजाय उनको ओर शिफ्ट हो। बैनर ले गए बसपाई सपा-बसपा गठबंधन होने के बाद हुई पहली चुनावी रैली में दोनों दलों के झंडे लगाए गए थे। दोनों दलों के बड़े नेताओं के आदमकद फोटो भी मंच के पास लगे थे। बसपा समर्थक मायावती के फोटो वाले बैनर ले गए। सपा नेताओं के बैनर वहीं रहे। आकाश आनंद रहे मौजूदबसपा के मंच पर मायावती के साथ ही उनके भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आकाश आनंद भी मौजूद रहे। मायवती के साथ ही उनका भी मंच पर स्वागत किया गया। आकाश आनंद अक्सर मायावती के साथ नजर आते हैं। मायावती ने जताई नाराजगीमंच पर व्यवस्था ठीक नहीं होने पर मायावती नाराजगी जताई। भाषण मंच पर रखा गया पायदान ऊंचा था। इसको लेकर मायावती ने मंच पर नाराजगी जताई। पार्टी प्रमुख की नाराजगी से पदाधिकारी असहज हो गए। मंच पर नहीं मिली जगह रैली स्थल पर दो मंच बने थे। मुख्य मंच में बसपा प्रमुख मायावती को रैली को संबोधित करना था। उसमें सपा प्रदेश प्रभारी और बसपा के पदाधिकारी मौजूद थे। सपा के कुछ जिला स्तरीय नेताओं को दूसरे मंच पर भी जगह नहीं मिली। बाद में बसपा के कुछ पदाधिकारियों ने उन्हें मंच पर जगह दिलाई। यह रहे मौजूद हरिद्वार प्रत्याशी डॉ. अंतरिक्ष सैनी, टिहरी बसपा प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप वालियान, जिला पंचायत अध्यक्ष सवित चौधरी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह, पूर्व विधायक हरिदास, सरवत करीम अंसारी, सपा प्रदेश प्रभारी सिद्वार्थ सिंह, पूर्व अध्यक्ष चौधरी चरण सिंह, शमशाद, अशोक चौधरी, दीपक सैनी, तेज सिंह राणा, भागमल, जितेंद्र कुमार, आदित्य ब्रजवाल, तेज सिंह पुंडीर, महावीर सिंह, उस्मान अली, कुंवर पाल सैनी, आदेश सैनी, नरेश सैनी, सुभाष सैनी, अनिल सैनी।

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