लहसून किसी अमृत से कम नही जानिये खाने के फायदे

लहसुन

आयुर्वेदिक मत – जड़ चरपरी, पत्ते कड़वे,नाल अग्र लवण और बीजों में मधुर रस।
विद्रधि- लहसुन को पीसकर उसको ह्नेसलीन में मिलाकर लेप करने से विद्रधि मिटती है।
वातरोग- लहसुन की लुगदी और उससे सिद्ध किये हुए तेल का सेवन करने से और उसकी मालिश करने से वात के समस्त रोग मिटते है। विषम ज्वर आौर अर्दित में भी इसके सेवन से लाभ होता है।
आमवात – लहसुन के एक तोला रस में गाय का एक तोला घी मिलाकर पीने से आमवात मिटता है।
बिच्छू का विष – लहसुन और अमचूर को पीसकर लगाने से बिच्छू का विष उतरता हैं।
पागल कुत्ते का विष – लहसुन को सिरके में पीसकर काटी हुई जगह पर लगाने से लहसुन का सेवन करने से पागल कुत्ते का विष उतरता है।
लकवा – लहसुन का पाक बनाकर खाने से लकवा में लाभ होता है।
गठिया – लहसुन के तेल की मालिश करने से गठिया और त्वचा कर शून्यता मिटती है।
आधाशीशी- लहसुन की कली को पीसकर कनपटी पर लगाने से आधाशीशी और दूसरे प्रकार के मस्तक-रोग मिटते है।
त्वचा के रोग- राई के तेल में लहसुन की कलियों को तलकर उस तेल का मर्दन करने से खुजली और दूसरे प्रकार के चर्मरोग मिटते है।
दमा – लहसुन के रस को गरम जल के साथ लेने से दमे में लाभ होता है।
हूपिंग कफ – बच्चे को इसकी छिली हुई कालियो की माला पहनाने से और बच्चो की छाती पर इसके तेल की मालिश करने से हूपिंग कफ और दूसरी खासी में लाभ होता है।
कान का बहरापन- लहसुन की दो कलियो को सवा तोले तिल्ली के तेल मे तलकर उसकी एक दो बूदं कान में टपकाने से कुछ दिनों में कान का बहरापन मिट जाता है।
चोट और मरोड़ – लहसुन की कली को नमक के साथ पीसकर उसका पुल्टिस बांधने से चोट और मरोड़ मे लाभ होता है। इसकी पुल्टिस बांधने से गठिया में भी लाभ होता है।
फोड़े- जिन फोडो में कीडे पड़ जाते है उन पर लहसुन लगाने से वे अच्छे हो जाते है।
गले के रोग – लहसुन को सिरके में भिगोकर खाने से दुखते हुए गले की ढीली पड़ी हुई रगों का संकोचन होता है और शब्दवाहिनी नाडियो का ढीलापन मिट जाता है।
ज्वर – लहसुन का प्रयोग करने से बार-बार आने वाला ज्वर छूट जाता है। शीत ज्वर के शीत को मिटने के लिये इसके तेल की मात्रा दी जाती है।

नोट – एक गिलास दूध में दो से तीन लहसुन की कली पकाकर पीने से पेट रोग साथ साथ अन्य रोग भी नष्ट हो जाते है।

चेतावनी – लहसुन के बाह्य प्रयोग करते समय यह ध्यान रखना चसहिये कि यह एक बहुत तीव्र जलन करने वाली और चर्मदाहक वस्तु है। इसके लेप को अधिक समय तक रखने से शरीर पर छाला उठ जाता है और काफी वेदना होती है। कोमल स्वभाव के लोगो पर इसका लेप करते समय सावधानी रखनी चाहिये।

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