सीएए के विरुद्ध प्रदर्शनों की वीडियो प्रति मुहैया कराने वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं, पुलिस ने कोर्ट से कहा

नई दिल्ली —–

देश की राजधानी दिल्ली में पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट  से कहा कि जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) छात्रा और पिंजड़ा तोड़ अभियान की कार्यकर्ता तथा उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के एक मामले में आरोपी देवांगना कलिता की नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों की वीडियो की प्रति मुहैया कराने का अनुरोध करने वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने न्यायमूर्ति सुरेश के. कैत के समक्ष याचिका के सुनवाई योग्य होने या नहीं होने का मामला उठाया। अदालत ने कहा कि प्रतिवादी (पुलिस) को याचिका के सुनवाई योग्य होने या नहीं होने के संबंध में एक सप्ताह में शपथपत्र दायर करने दीजिए और इसके बाद यदि कोई जवाब होता है, तो उसे उसके बाद पांच दिन के भीतर दायर किया जाएगा। मामले की आगे की सुनवाई के लिए चार फरवरी की तारीख तय की गई। वकील अदित एस. पुजारी, तुषारिका मट्टू और कुणाल नेगी के माध्यम से दायर याचिका में कलिता ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शनों के वीडियो और पुलिस के पास मौजूद अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा की प्रति मुहैया कराए जाने का अनुरोध किया है, जिन्हें आरोपपत्र के साथ दायर किया गया था। कलिता अवैध गतिविधियां (निवारण) कानून के तहत न्यायिक हिरासत में है लेकिन उसे जाफराबाद क्षेत्र में दंगों के सिलसिले में जमानत मिल गई थी। संशोधित नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच संघर्ष के बाद 24 फरवरी को उत्तरपूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे, जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और करीब 200 लोग जख्मी हो गए थे।

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