डेढ़ माह से आंदोलनरत किसानों को 46वां दिन, बंद रहेंगे गाजीपुर और चिल्ला बॉर्डर

नई दिल्ली —

केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों के खिलाफ एक महीने से अधिक समय से जारी किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार और किसानों के बीच आठवें दौर की वार्ता भी शुक्रवार को विफल रही। सरकार ने कानूनों को रद्द करने की मांग खारिज कर दी तो वहीं किसानों ने कहा कि उनकी लड़ाई आखिरी सांस तक जारी रहेगी और ‘घर वापसीश् तभी होगी जब इन कानूनों को वापस लिया जाएगा। अब अगली बैठक 15 जनवरी को होगी। वहीं किसान आंदोलन को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने गाजीपुर और चिल्ला बॉर्डर के रास्ते राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश पर रोक लगा दी है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक आनंद विहार, डीएनडी, भोपरा और लोनी बॉर्डर के रास्ते दिल्ली में प्रवेश किया जा सकता है।

11 जनवरी को किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं पर एक साथ निर्धारित सुनवाई होनी है। कोर्ट की सुनवाई के बाद ही किसान अब आगे की रणनीति तैयार करेंगे। किसानों ने 11 जनवरी को किसानों की बैठक बुलाई है। किसानों का कहना है कि उनको सरकार के साथ अगली बैठक में भी कोई नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं है। बता दें कि शुक्रवार को विज्ञान भवन में हुई बैठक सिर्फ दो घंटे चली और इसमें भी चर्चा सिर्फ एक घंटे ही हो सकी। इसके बाद किसान नेताओं ने हाथों में श्जीतेंगे या मरेंगेश् लिखी तख्तियां लेकर मौन धारण कर लिया। किसान नेताओं ने दोपहर के भोजन के लिए ब्रेक भी नहीं लिया तो उधर वार्ता में शामिल तीनों मंत्री आपसी चर्चा के लिए चले गए।

किसान नेताओं ने हालांकि जोर दिया कि कानूनों को निरस्त करने से कम पर वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे फसलों के त्योहार लोहड़ी और बैशाखी भी प्रदर्शन स्थलों पर मनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर कड़ाके की इस ठंड में भी आंदोलन कर रहे किसान पूर्व की योजना के मुताबिक 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालेंगे।

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