बर्ड फ्लू से डरने की जरूरत नहीं, पकाकर चिकन, अंडे खाना सुरक्षित

नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए चाकचैबंद प्रबंध किए हैं और सभी प्रकार के जरूरी उपाय किए जा रहे हैं, इसलिए चिकन या अंडे खाने से डरने की जरूरत नहीं है। यह कहना है केंद्र सरकार में पशुपालन आयुक्त डॉ प्रवीण मलिक का। डॉ मलिक ने कहा कि मुर्गो में बर्ड फ्लू की इस साल अभी तक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर पुष्टि होती भी है तो डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस दिशा में पहले से ही सतर्कता बरती जा रही है। बर्ड फ्लू की खबर आने के बाद देश में चिकन और अंडे की बिक्री घट गई है, क्योंकि लोग घबराए हुए हैं। पशुपालन आयुक्त ने कहा कि अंडे और चिकन को अगर सही तरीके से पकाकर खाएं तो यह पूरी तरह सुरक्षित है।

डॉ मलिक ने बताया कि अब तक चार राज्यों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें से राजस्थान और मध्यप्रदेश में कौव्वों में जबकि हिमाचल प्रदेश में प्रवासी पक्षियों में और केरल में घरेलू बतख में बर्ड फ्लू की रिपोर्ट है। उन्होंने बताया कि केरल में पहले रोकथाम के उपायों के तहत बर्ड को मारने की प्रक्रिया को अमल में लाया जा चुका है। उन्होंने बताया, ष्पोल्ट्री बर्ड में जहां कहीं भी बर्ड फ्लू यानी एवियन इन्फ्लूएंजा (एआई) की रिपोर्ट मिलती है, वहां प्रभावित फार्म के सारे बर्ड और एक किलोमीटर के एरिया में लोगों ने जो भी बर्ड पाल रखा है सबको खत्म कर दिया जाता है और सरकार की ओर लोगों को उसका मुआवजा दिया जाता है। इसके बाद अगले 10 किलोमीटर तक निगरानी बढ़ा दी जाती है और उस क्षेत्र से नमूने लेकर जांच करवाते हैं। इसके बाद पोस्ट सर्विलांस ऑपरेशन चलता है इसमें दो-तीन महीने रिपोर्ट निगेटिव रहती है तो फिर उसे बर्ड फ्लू मुक्त एरिया घोषित कर दिया जाता है। डॉ मलिक ने बताया कि दुनिया में बर्डफ्लू 1996 में प्रकाश में आई, लेकिन भारत में यह 2006 में आने से एक साल पहले 2005 में ही इससे बचाव की कार्ययोजना बना ली गई थी। उन्होंने बताया कि 2006 के बाद से सर्दियों में लगातार दो-तीन राज्यों में बर्ड फ्लू की रिपोर्ट मिलती रही है और इस दौरान कार्ययोजना में भी बदलाव किए गए हैं।

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