मंत्रिमंडल ने आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना को मंजूरी दी

नई दिल्ली ——

देश में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना को मंजूरी दी है। सामाजिक सुरक्षा संहिता के अगले साल एक अप्रैल से लागू होने की उम्मीद है। इससे देशभर के 40 करोड़ असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के दरवाजे खुल सकते हैं। नए साल में ईपीएफओ को मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना को लागू करने पर ध्यान देकर सेवाओं की सुपुर्दगी में सुधार लाने के लिए भागीरथ प्रयास करने होगा। इसके बाद ईपीएफओ को अपनी योजनाओं और सेवाओं को नए माहौल के अनुरूप ढालना होगा, क्योंकि इससे असंगठित क्षेत्र के कामगार भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे।

स्कीम के तहत उन कर्मचारियों को कवर मिलेगा, जिन्होंने 1 अक्टूबर 2020 से 30 जून 2021 के बीच नौकरी शुरु की है। योजना पर मौजूदा वित्त वर्ष में 1584 करोड़ रुपये खर्च होगा। वहीं 2020-2023 तक पूरी योजना अवधि के दौरान खर्च 22810 करोड़ रुपये आएगा। देश में 40 करोड़ से ज्यादा असंगठित क्षेत्र के कामगार हैं, जो कि किसी प्रतिष्ठान अथवा कंपनी के वेतन रजिस्टर में नहीं आते हैं और उन्हें भविष्य निधि और ग्रेच्युटी जैसे लाभ प्राप्त नहीं हैं। मोदी सरकार ने इन सभी को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए ईपीएफओ के तहत लाने की योजना तैयार की है। दरअसल आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत नई नियुक्तियां करने वाले एंप्लॉयर्स को सब्सिडी दी जाएगी। सब्सिडी इंप्लॉइज और इंप्लॉयर्स द्वारा दो साल के लिए किए गए रिटायरमेंट फंड कंट्रीब्यूशन यानी पीएफ को कवर करने के लिए होगी। पीएफ में इंप्लॉइज द्वारा किए जाने वाले 12 फीसदी योगदान और कर्मचारी द्वारा किए जाने वाले 12 फीसदी योगदान यानी कुल 24 फीसदी योगदान के बराबर सब्सिडी सरकार की ओर से दो साल के लिए कर्मचारी को दी जाएगी। योजना के तहत सरकार 1,000 लोगों तक को नए रोजगार देने वाली कंपनियों को इंप्लॉई व एंप्लॉयर दोनों की ओर से पीएफ अंशदान का भुगतान करेगी। वहीं 1,000 से अधिक लोगों को नए रोजगार देने वाली कंपनियों को प्रत्येक कर्मचारी के 12 फीसदी अंशदान का ही दो साल तक भुगतान करेगी। भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के पूर्व महासचिव ब्रिजेश उपाध्याय ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता के अमल में आने पर ईपीएफओ के समक्ष 2021 में नई चुनौतियां सामने आएंगी। उन्होंने कहा, असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए अपनी योजनाओं और नेटवर्क का दायरा बढ़ाना होगा।

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