चीनी राजदूत ने की राष्ट्रपति संग बंद कमरे में गुप्त बैठक

नई दिल्ली —–

नेपाल में संसद भंग होने के बाद से सियासी संकट बढ़ गया है। ओली और प्रचंड खेमों के बीच टकराव से बढ़ी सियासी खींचतान के बीच एक बार फिर से चालबाज चीन की दखलअंदाजी सामने आई है। काठमांडू में जारी सियासी गतिरोध के बीच नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांकी ने राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मुलाकात की। इस मामले से परिचित लोगों ने कहा कि दोनों के बीच एक घंटे तक बातचीत चली। दो दिन पहले ही नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने ओली सरकार की सिफारिश को स्वीकार करते हुए देश की संसद को भंग कर दिया। नेपाल में अब मध्यावधि चुनावों की घोषणा हो चुकी है। अप्रैल में दो चरणों में चुनाव होंगे। राष्ट्रपति के अनुसार तीस अप्रैल और दस मई को चुनाव होना तय हुआ है। इधर, नेपाल में ही पुष्प कमल दहल श्प्रचंडश् नीत खेमे ने केंद्रीय समिति की बैठक के बाद प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष पद से हटाने और पार्टी विरोधी गतिविधि के आरोप में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की घोषणा की। इससे पहले, ओली ने संगठन पर अपनी पकड़ को मजबूत करने के उद्देश्य से मंगलवार को पार्टी की आम सभा के आयोजन के लिए 1199 सदस्यीय नई समिति का गठन किया था। सत्तारूढ़ दल एनसीपी इसके गठन के करीब दो साल बाद टूट की तरफ बढ़ रहा है। मई 2018 में ओली के नेतृत्व वाले सीपीएन-यूएमएल और प्रचंड के नेतृत्व वाले सीपीएन (माओवादी) का विलय हुआ था। प्रचंड द्वारा प्रधानमंत्री ओली पर पावर शेयरिंग के समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाने के बाद पिछले कई महीनों से पीएम ओली और प्रचंड के बीच सत्ता को लेकर तकरार जारी है। इस तनातनी को कम करने और इस साल पिछले कई मौकों पर दोनों के बीच सुलह कराने में चीनी राजदूत सफल रही हैं, मगर पिछले कुछ महीनों में चीन की कोशिश नाकाम होती दिखी। खासकर बीजिंग ने संकेत दिया कि वह प्रधानमंत्री के बदलने के पक्ष में नहीं है। मंगलवार को राष्ट्रपति के साथ चीनी दूत बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मगर काठमांडू के राजनीतिक गलियाों में इस तरह की अटकलें जोरों पर थीं कि नेपाली राष्ट्रपति और चीनी राजदूत के बीच मंगलवार की बैठक कोरोना के टीकों की आपूर्ति पर चर्चा करने के लिए थी। हालांकि,  मुलाकात के बीच बातचीत के इस वर्जन को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। विदेश मामलों के जानकारों को नहीं लगता कि चीनी राजदूत कोविड के टीकों की आपूर्ति पर बैठक के लिए गई थी। जब इस साल जुलाई में राष्ट्रपति भंडारी और पीएम ओली और उनके प्रतिद्वंद्वियों सहित अन्य राजनीतिक नेताओं के साथ राजदूत होऊ यांकी की बैठकों के बाद एक विवाद खड़ा हुआ था, तो चीनी दूतावास के प्रवक्ता झांग सी ने काठमांडू पोस्ट को बताया था कि चीन नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को संकट में नहीं देखना चाहता है और उसने उम्मीद जताई थी कि नेपाली नेता अपने मतभेदों को खत्म कर लेंगे और एकजुट रहेंगे। झांग ने आगे कहा था कि दूतावास नेपाली नेताओं के साथ अच्छे संबंध रखता है और किसी भी सुविधाजनक समय पर सामान्य हित के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए तैयार है।

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