आंदोलनकारियों ने विधानसभा पर मार्च कर विरोध दर्ज किया

देहरादून……..

उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच से जुड़े हुए आंदोलनकारियों ने आठ सूत्रीय मांगों के समाधान के लिए विधानसभा मार्च कर अपना विरोध दर्ज किया और जैसे ही रिस्पना पुल के पास तो पुलिस ने बैरीकैडिंग लगाकर सभी को रोक लिया और इस बीच पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई और बाद में सभी वहीं धरने पर बैठ गये।
यहां मंच से जुड़े हुए आंदोलनकारी प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी के नेतृत्व में नेहरु कालोनी स्थित शहीद रविन्द्र रावत (पोलू) स्मारक में एकत्रित हुए और वहां से अपनी आठ सूत्रीय मांगों के समाधान को नारेबाजी करते हुए विधानसभा मार्च किया और जैसे ही रिस्पना पुल के पास पहंुचे तो पुलिस ने बैरीकैडिंग लगाकर सभी को रोक लिया और इस बीच पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई और बाद में सभी वहीं धरने पर बैठ गये।
इस अवसर पर मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि ठीक एक वर्ष पूर्व भी राज्य आन्दोलनकारियों द्वारा अपनी मांगो को लेकर घेराव किया गया था जिसमें उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत व धर्मपुर विधायक विनोद चमोली द्बारा त्रिपक्षीय वार्ता का भरोसा दिया था परन्तु आज तक सरकार व मंत्री दोनो की ओर से कोई संवाद नही किया गया। आखिर जनता किस पर विश्वास करें। उन्होंने कहा कि ने वर्तमान सरकार द्वारा लगातार राज्य आंदोलनकारियों की घोर उपेक्षा और संवादहीनता के चलते सभी राज्य आंदोलनकारियो मे आक्रोश पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस आक्रोश के चलते राज्य आंदोलनकारी संयुक्त संगठन के बैनर तले पूर्व मे भी विधानसभा धेराव किया गया और दोनो हीं समय मुख्यमन्त्री से वार्ता का आश्वासन दिया गया परन्तु आज तक सरकार द्वारा कोई संवाद नही किया गया।
उन्होंने कहा कि राज्य आन्दोलनकारियों की प्रमुख मांगांे में मुजफ्फरनगर , खटीमा, मसूरी गोली काण्ड के दोषियों को सजा दिलाये जाने, राज्य आंदोलनकारीयों का 10 प्रतिशत शिथिलता (क्षैतिज आरक्षण एक्ट) लागू किये जाने और चार वर्षो से चिन्हीकरण के लम्बित प्रक्रिया के साथ हीं एक समान पेंशन लागू करें एवं राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का शीघ्र गठन किया जाये, शहीद परिवार व राज्य आन्दोलनकारियों के आश्रितों की पैशन का शासनादेश पुनः लागू किये जाने, स्थाई राजधानी गैरसैण शीघ्र घोषित किये जाने, समूह ग भर्ती हेतु रोजगार कार्यालय पंजीकरण मे स्थाई स्थाई निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता लागू किये जाने सहित अन्य मांगें शामिल है।

राज्य आंदोलनकारी मंच से जुड़े हुए आंदोलनकारियों ने आठ सूत्रीय मांगों के समाधान के लिए विधानसभा मार्च कर अपना विरोध दर्ज किया और जैसे ही रिस्पना पुल के पास पहंुचे तो पुलिस ने बैरीकैडिंग लगाकर सभी को रोक लिया और इस बीच पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई और बाद में सभी वहीं धरने पर बैठ गये।
यहां मंच से जुड़े हुए आंदोलनकारी प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी के नेतृत्व में नेहरु कालोनी स्थित शहीद रविन्द्र रावत (पोलू) स्मारक में एकत्रित हुए और वहां से अपनी आठ सूत्रीय मांगों के समाधान को नारेबाजी करते हुए विधानसभा मार्च किया और जैसे ही रिस्पना पुल के पास पहंुचे तो पुलिस ने बैरीकैडिंग लगाकर सभी को रोक लिया और इस बीच पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई और बाद में सभी वहीं धरने पर बैठ गये।
इस अवसर पर मंच के अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि ठीक एक वर्ष पूर्व भी राज्य आन्दोलनकारियों द्वारा अपनी मांगो को लेकर घेराव किया गया था जिसमें उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत व धर्मपुर विधायक विनोद चमोली द्बारा त्रिपक्षीय वार्ता का भरोसा दिया था परन्तु आज तक सरकार व मंत्री दोनो की ओर से कोई संवाद नही किया गया। आखिर जनता किस पर विश्वास करें। उन्होंने कहा कि ने वर्तमान सरकार द्वारा लगातार राज्य आंदोलनकारियों की घोर उपेक्षा और संवादहीनता के चलते सभी राज्य आंदोलनकारियो मे आक्रोश पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस आक्रोश के चलते राज्य आंदोलनकारी संयुक्त संगठन के बैनर तले पूर्व मे भी विधानसभा धेराव किया गया और दोनो हीं समय मुख्यमन्त्री से वार्ता का आश्वासन दिया गया परन्तु आज तक सरकार द्वारा कोई संवाद नही किया गया।
उन्होंने कहा कि राज्य आन्दोलनकारियों की प्रमुख मांगांे में मुजफ्फरनगर , खटीमा, मसूरी गोली काण्ड के दोषियों को सजा दिलाये जाने, राज्य आंदोलनकारीयों का 10 प्रतिशत शिथिलता (क्षैतिज आरक्षण एक्ट) लागू किये जाने और चार वर्षो से चिन्हीकरण के लम्बित प्रक्रिया के साथ हीं एक समान पेंशन लागू करें एवं राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का शीघ्र गठन किया जाये, शहीद परिवार व राज्य आन्दोलनकारियों के आश्रितों की पैशन का शासनादेश पुनः लागू किये जाने, स्थाई राजधानी गैरसैण शीघ्र घोषित किये जाने, समूह ग भर्ती हेतु रोजगार कार्यालय पंजीकरण मे स्थाई स्थाई निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता लागू किये जाने सहित अन्य मांगें शामिल है।

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