दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर किसानों का कब्जा

नई दिल्ली ——–

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध अब भी बरकरार है। कानूनों को रद्द कराने पर अड़े किसान इस मुद्दे पर सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुके हैं। इसके लिए दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन  27वें दिन भी जारी है। किसानों ने सरकार से जल्द उनकी मांगें मानने की अपील की है। वहीं सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि कानून वापस नहीं होगा, लेकिन संशोधन संभव है। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा किसान संगठन नेताओं के पास  देर रात भेजे गए वार्ता के प्रस्ताव पर संयुक्त मोर्चा की मंगलवार को होने वाली बैठक में फैसला होगा। 32 किसान संगठनों के अधिकांश नेता केंद्र सरकार के उक्त प्रस्ताव को रस्मी मान रहे हैं, लेकिन सरकार के साथ बातचीत करनी है अथवा नहीं, इसका फैसला संयुक्त मोर्चा के नेता सामूहिक रूप से लेंगे। कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने रविवार देर रात पांच पन्नों का वार्ता संबंधी प्रस्ताव किसान संगठनों के नेताओं के पास भेजा है। इसमें उल्लेख है कि सरकार हमेशा खुले मन से इस समस्या के समधान के लिए किसानों से बातचीत के लिए तैयार है। किसान संगठन के नेता अपनी सुविधा के अनुसार वार्ता की तारीख तय कर सरकार को सूचित कर दें। पत्र में उल्लेख है कि किसान नेता दर्शनपाल की ओर से सरकार द्वारा 9 दिसंबर को भेजे गए लिखित प्रस्ताव को खारिज करने की सूचना दी गई थी। लेकिन इससे यह नहीं पता चल रहा है कि यह उनका अकेले का फैसला है अथवा सभी किसान संगठनों ने सामूहिक निर्णय लिया है। सरकार के प्रस्ताव को संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने बैठक कर सामूहिक रूप से खारिज किया। इसकी सूचना ईमेल के माध्यम से दी गई। किसान नेताओं में इस बात को लेकर रोष है कि सरकार इसे अकेले का फैसला बता रही है। किसान नेताओं का कहना है कि क्या सरकार को किसानों की मांगों का पता नहीं है। विदित हो कि अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के अलग अलग बार्डर पर बड़ी संख्या में किसान कड़ी सर्दी में भी चार हफ्तों से डटे हैं।

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