कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद विपक्षी पार्टियों ने लिया यू-टर्न

नई दिल्ली –

सरकार के साथ कई दौरों की बातचीत और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बावजूद किसान आंदोलन फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है। वही दूसरी तरफ, विपक्षी पार्टियां लगातार मोदी सरकार पर इस कानून को लेकर हमले कर रही हैं और इस बिल को किसान विरोधी तथा कॉरपोरेट घरानों के फायदे वाला बता रही है। इसके जवाब में केंद्र सरकार का कहना है कि विपक्षी पार्टियां किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रही हैं, जबकि वे खुद सालों से एपीएमसी ऐक्ट को हटाने या संशोधन करने के पक्षधर रही हैं। तो क्या सच में विपक्षी पार्टियां सिर्फ विरोध की खातिर अब अपने ही वादे से पलट रही हैं? राहुल गांधी नए कृषि कानूनों को श्अदानी-अंबानी कृषि कानूनश् का नाम दे चुके हैं। उनका कहना है कि सरकार ने ये कानून देश के बड़े उद्योगपतियों को नफा पहुंचाने के लिए बनाए हैं। हालांकि, कांग्रेस ने 2019 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले जारी अपने घोषणापत्र में जनता से वादा किया था कि वह अग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी ऐक्ट को खत्म कर देगी।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने केंद्र के लाए तीनों कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। केजरीवाल का  भी आरोप है कि ये तीनों बिल किसान विरोधी हैं और कुछ बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के मकसद से लाए गए हैं। बिलों का विरोध करने के लिए उन्होंने दिल्ली विधानसभा का एक दिन का सत्र बुलाया और अपने विधायकों के साथ कृषि कानूनों की कॉपियां फाड़ीं। नए कानून के जरिये अब एपीएमसी मंडियों के बाहर भी किसानों को अपनी उपज बेच पाएंगे। लेकिन, सरकार ने इस कानून के जरिए एपीएमसी मंडियों को एक सीमा में बांध दिया है। इसके जरिए बड़े कॉरपोरेट खरीदारों को खुली छूट दी गई है। बिना किसी पंजीकरण और बिना किसी कानून के दायरे में आए हुए वे किसानों की उपज खरीद-बेच सकते हैं।

किसान और व्यापारियों को इन विधेयकों से मंडियां खत्म होने की आशंका है। नए कृषि बिल के मुताबिक, किसान अब एपीएमसी मंडियों के बाहर किसी को भी अपनी उपज बेच सकता है, जिस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जबकि एपीएमसी मंडियों में कृषि उत्पादों की खरीद पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मंडी शुल्क व अन्य उपकर हैं। इसके चलते आढ़तियों और मंडी के कारोबारियों को डर है कि जब मंडी के बाहर बिना शुल्क का कारोबार होगा तो कोई मंडी आना नहीं चाहेगा। किसानों को यह भी डर है नए कानून के बाद एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद सरकार बंद कर देगी।

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