आंदोलनरत किसानों का समर्थन करने पहुंचा वर्दीधारी फौजी, अलर्ट हुआ खुफिया तंत्र

बठिंडा ———-

नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों के समर्थन में एक  वर्दीधारी फौजी के आने के बाद खुफिया तंत्र अलर्ट हो गया है। ‘मेरा पिता किसान है, अगर किसान आतंकवादी है तो वह भी आतंकवादी है’ यह कहना ड्यूटी पर तैनात एक फौजी का है जो किसानों द्वारा लगाए गए धरने में शामिल हुआ और बैनर पकड़े किसानों को समर्थन देने पहुंचा। सिविल अस्पताल के पास लगे किसान धरने में जहां पूर्व सैनिक बड़ी संख्या में शामिल हुए, वहीं एक छावनी में तैनात वर्दीधारी फौजी भी पहुंचा। यह पहला मौका है कि एक वर्दीधारी फौजी ने किसानों को समर्थन दिया है और किसान पुत्र होने के नाते किसानों को आतंकवादी कहने पर उसकी भावना जागृत हुई और कहा कि वह भी आतंकवादी है। आज के धरने को लेकर खुफिया तंत्र सतर्क हुआ यहां तक कि यह बात बठिंडा छावनी तक पहुंची तो सैनिक अधिकारियों में खलबली मच गई। खुफिया एजैंसियों को इस बात का डर है कि कहीं किसान आंदोलन 1984 में हुए ‘नीला तारा आप्रेशन’ की तरह रूप धारण न कर ले जैसे उस समय सिख फौजियों ने बगावत कर ली थी और बाद में उन्हें धर्मी फौजियों की संज्ञा दी गई।

शनिवार को पंजाब जेल विभाग के डीआईजी लखविन्द्र सिंह जाखड़ ने किसानों के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा दिया था। इससे पहले कई राजनीतिक विधायकों व नेताओं सहित कई संगठन, लोक गायक बॉलीवुड के कई कलाकार किसान आंदोलन को समर्थन दे चुके हैं। किसान आंदोलन की लहर देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी फैलने लगी है, अमरीका, इंग्लैड, जर्मन, आस्ट्रेलिया, कनाडा जैसे देशों में भारतीय मूल के कई लोग किसान समर्थन में आए और उन्होंने भारतीय दूतावास के बाहर धरने प्रदर्शन भी किए। इस संबंध में किसी भी सैनिक अधिकारी ने पुष्टि नहीं की कि यह सैनिक किस यूनिट का है।

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