अपने प्रतिनिधियों और सरकारों का चुनाव उनके प्रदर्शन के आधार पर करें- नायडू

नई दिल्ली ————-

भारत के उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने लोगों से अपने प्रतिनिधियों और सरकारों का उनके प्रदर्शन के आधार पर चुनाव करने की अपील की। विशाखापट्टनम में आज वाईपीओ-ग्रेटर इंडिया चैप्टर के सदस्यों के साथ ऑनलाइन बातचीत के दौरान, उपराष्ट्रपति ने राजनीति में कास्ट (जाति), क्रिमनैलिटी (आपराधिक पृष्ठभूमि), कम्यूनिटी (समुदाय) और कैश (नगदी) के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई और उनसे अपने प्रतिनिधियों को चुनते समय कैलिबर (मानसिक शक्ति), कंडक्ट (आचरण), कैपेसिटी (क्षमता) और कैरेक्टर (चरित्र) को प्राथमिकता देने के लिए कहा। राजनीति को ‘लोगों की सेवा करने वाला मिशन’ बताते हुए, उन्होंने लंबी अवधि की रचनात्मक नीतियों की जगह पर लोकप्रियतावाद का सहारा लेने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई।

उपराष्ट्रपति ने संसद और राज्यों की विधानसभाओं में चर्चा के गिरते स्तर पर भी चिंता जताई। नायडू ने कहा, “सभी जगहों पर बहस का स्तर नीचे जा रहा है।” उन्होंने कहा कि पहले बहस को गरिमापूर्ण बनाए रखा जाता था और उसमें हास्य-विनोद भी शामिल होता था। इस बारे में, उन्होंने विधि निर्माताओं से डिसकस (बातचीत), डिबेट (बहस) और डिसाइड (निर्णय लेने) करने और कार्यवाही को डिस्टर्ब (बाधित) न करने का आग्रह किया। उन्होंने राजनेताओं को सलाह दी कि वे अपने विरोधियों को प्रतिद्वंद्वी मानें, न कि दुश्मन। राज्यसभा के अध्यक्ष के रूप में, वे समझा-बुझाकर और सलाह के जरिए अनुशासन लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने मीडिया से संसद द्वारा किए जा रहे सकारात्मक कार्यों पर ज्यादा ध्यान देने का आग्रह किया। मीडिया की विश्वसनीयता में गिरावट को देखते हुए, उन्होंने कहा कि ‘न्यूजपेपर’ ‘व्यूज-पेपर’ (विचार-पत्र) बन गये हैं। किसानों के मुद्दे पर, उपराष्ट्रपति ने कहा कि रचनात्मक बातचीत के माध्यम से सभी आशंकाओं को दूर किया जा सकता है।

अपनी जीवन यात्रा को एक उदाहरण के रूप में पेश करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले एक किसान परिवार से होने के बावजूद, वे सिर्फ अपने अनुशासन, कड़ी मेहनत, समर्पण और मजबूत भरोसे के चलते देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद तक पहुंच सके हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने दूसरों के जीवन से बहुत कुछ सीखा है। लोगों के साथ समय बिताकर उनका अध्ययन किया।” उन्होंने कहा इससे मिली सीख ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने में मदद की। उपराष्ट्रपति ने उद्योग के युवा नेतृत्वकर्ताओं को जीवन में उत्कृष्ठता को पाने के लिए कड़ी मेहनत करने, भरोसे को मजबूत बनाए रखने और दूसरों के अनुभवों से सीखने की सलाह दी।

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