भारत और म्यांमार के बीच 5वीं द्विपक्षीय बैठक का वर्चुअल रूप से आयोजन

नई दिल्ली ———

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) भारत और म्‍यांमार की नशीली दवाओं के दुरुपयोग नियंत्रण की केन्‍द्रीय समिति के बीच ड्रग नियंत्रण सहयोग के बारे में 5वीं भारत- म्यांमार द्विपक्षीय बैठक का 10 दिसंबर,को वर्चुअल रूप से आयोजन किया गया। नारकोटिक्‍स कंट्रोल ब्‍यूरो के महानिदेशक राकेश अस्थाना ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का और म्यांमार के शिष्‍टमंडल का नेतृत्व ड्रग प्रवर्तन प्रभाग (डीईडी) एवं ड्रग दुरुपयोग नियंत्रण की केन्‍द्रीय समिति के संयुक्‍त सचिव पॉल. ब्रिगेडियर जनरल विंग नेंग ने किया। एनसीबी के महानिदेशक राकेश अस्‍थाना ने विशेष रूप से हेरोइन और एमफेटामाइन टाइप स्टिमुलेंट्स (एटीएस) की तस्करी से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डाला।

अस्थाना ने कहा कि पूर्वोत्‍तर राज्यों में नशीली दवाओं का अधिक दुरुपयोग व्‍याप्‍त होने से भारत से लगती म्‍यांमार सीमा भारत के लिए चिंता का एक मुख्‍य कारण बन गई है। भारत-म्यांमार सीमा में सेंध के अलावा, बंगाल की खाड़ी में समुद्री मार्ग से हो रही नशीली दवाओं की तस्करी दोनों देशों के लिए एक चुनौती के रूप में उभरी है। एनसीबी इस क्षेत्र में नशीली दवाओं के खतरे से निपटने के लिए म्यांमार के साथ जानकारी और सहायता साझा करने के मौजूदा तंत्र को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है।

डीईड के कमांडर पोल. ब्रिगेडियर जनरल विंग नेंग ने याबा टेबलेट (मेथम्फेटामाइन) के उत्पादन के उस बढ़ते खतरे पर प्रकाश डाला, जिसके कारण इस क्षेत्र में गंभीर चिंता पैदा हो गई है। हालांकि भारत और म्यांमार के बीच पिछले कुछ वर्षों के दौरान सहयोग के तंत्र में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने नशीली दवाओं की तस्‍करी तथा तस्‍करी की गतिविधियों की अगुवाई करने वालों के बारे में प्रत्‍येक स्‍तर पर लगातार जानकारी के आदान-प्रदान को विकसित करने का आग्रह किया। डीईडी के कमांडर ने नशीली दवाओं के बढ़ते खतरे का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार और एनसीबी द्वारा लगातार किये जा रहे प्रयासों की सराहना की।

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