कांग्रेसियों के लिए हर मर्ज की दवा थे अहमद पटेल!

नई दिल्ली

सोनिया गांधी के अति करीबी व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल का 71 साल की उम्र में बुधवार को निधन हो गया। अहमद पटेल एक महीने पूर्व कोरोना वायरस से संक्रमित थे। उनका इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा था, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें नहीं बचाया जा सका। बता दें कि अहमद पटेल ने 1 अक्टूबर को खुद ट्वीट करके कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी दी थी। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा था कि मैं कोरोना पॉजिटिव पाया गया हूं, जो लोग मेरे संपर्क में आए हैं मैं उन सभी से आग्रह करता हूं कि वे खुद को आइसोलेट कर लें। पटेल को कांग्रेस का संकटमोचक कहा जाता था। वह सोनिया गांधी के सबसे करीबी और राजनीतिक सलाहकार थे। उनके निधन की जानकारी उनके बेटे फैसल पटेल ने ट्वीट कर साझा की है। उन्होंने लिखा है कि श्बहुद दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि मेरा पिता अहमद पटेल का निधन 25 नवंबर की सुबह 3.30 बजे हुआ। करीब महीने भर पहले वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती गई। उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया। मैं सभी शुभचिंतकों से प्रार्थना करता हूं कि वे कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करें।श्

गौरतलब है कि अहमद पटेल अक्टूबर के पहले सप्ताह में कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे। तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, 18 नवंबर को अहमद पटेल की पुत्री ने यह जानकारी साझा की थी कि उनके पिता की सेहत में सुधार हो रहा है। पटेल की पुत्री मुमताज ने एक ऑडियो संदेश के माध्यम से यह जानकारी दी थी। गुजरात के भरूच जिले के अंकलेश्वर में पैदा हुए अहमद पटेल का राजनीतिक कॅरियर काफी लंबा है। पटेल 3 बार लोकसभा सांसद और 5 बार राज्यसभा सदस्य रहे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जमाने में पटेल पहली बार 1977 में भरूच संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव लड़े और विजयी हुए। 1980 के लोकसभा चुनाव में वह फिर भरूच संसदीय सीट से चुनाव लड़े और विजयी हुए। 1984 के लोकसभा चुनाव में वह फिर निर्वाचित हुए। 1993 से अहमद राज्यसभा सदस्य थे। 2001 से वह सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार है। वह सोनिया गांधी के बेहद करीबी रहे। पटेल को 10 जनपथ का चाणक्य कहा जाता था। कांग्रेस पार्टी में उनका दबदबा था। उनके बारे में खास बात यह है कि वह कभी मंत्री नहीं रहे, लेकिन सत्ता के केंद्र में रहे। वह सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार व बेहद करीबी थे। कांग्रेस में वह बेहद ताकतवर व असरदार होते हुए भी लो-प्रोफाइल रखते थे। पटेल की कोशिश रहती थी कि दिल्ली और देश की मीडिया में उनकी जरा भी खबर न चले। सत्ता के केंद्र में रहते भी वह सुर्खियों से दूर रहते थे। वह किसी भी टीवी चैनल पर नहीं दिखते थे। राजीनति से दूर उन्हें बड़ी सादगी का जीवन बिताना पसंद था।

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