भेड़-बकरी पालन सहकारी समितियों का गठन होगा


देहरादून – पहाड़ के लोगों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने और पलायन रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने एक नई पहल की है। एनसीडीसी यानी नेशनल कापरेटिव डेवलपमेंट कमीशन के तहत शुरू होने वाली इस योजना से पशुपालकों को खासा लाभ होगा। पशुपालन विभाग जिले में प्राथमिक भेड़-बकरी पालन सहकारी समितियों का गठन करेगा। इसके तहत प्रत्येक पशुपालकों को दस-दस बकरियां उपलब्ध कराई जाएंगी। बकरियों के चारे आदि का प्रबंध भी विभाग ही करेगा, जबकि पशुपालकों को उन्हें महज पालना होगा। आठ से दस माह बाद बकरियों को खरीद लिया जाएगा। जिसके बाद इन्हें हिमालयन मांस के नाम से बेचा जाएगा।
दरअसल पशुपालन विभाग बकरी पालकों के लिए एक योजना लाया है। योजना के तहत विभाग पशुपालकों को दस-दस बकरियां देने जा रहा है। भेड़-बकरी पालक सहकारी समितियां बनाई जा रही हैं। जिनके जरिए उच्च हिमालय क्षेत्र कपकोट, कांडा, स्यांकोट, गरुड़, डंगोली और बागेश्वर के 400 पशुपालकों को इसका लाभ मिलने जा रहा है। योजना अभी पाइप लाइन में है और जल्द यह किसानों तक पहुंचेगी। पशुपालकों को दी जाने वाली बकरियों का चारा, देखरेख आदि का जिम्मा भी विभाग का होगा। बकरी आठ या दस माह उम्र की होने पर करीब दस किलो वजन पर उसे खरीद लिया जाएगा और पशु पालन विभाग के स्लाटर हाउसों को भेजा जाएगा। वहां से 800 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से मांस बेचा जाएगा।
कपकोट के उच्च हिमालय क्षेत्र के अलावा कांडा, स्यांकोट, गरुड़, डंगोली और बागेश्वर में भी समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों के सदस्यों को ही दस-दस बकरियां दी जाएंगी और उनके चारे आदि का भी विभाग इंतजाम करेगा। आठ या दस माह में बकरियां जैसे ही 10 किलो वजनी हो जाएंगी उन्हें खरीद लिया जाएगा और हिमालयन मांस के नाम से 800 रुपये प्रतिकिलो बेचा जाएगा। इससे पशुपालकों की आय बढ़ेगी और उन्हें आसानी से विपणन की सुविधा भी मुहैया हो सकेगी। योजना से 25 प्राथमिक भेड़-बकरी पालकों को सीधा लाभ होगा। इसके अलावा 400 पशुपालकों को सदस्य बनाया गया है। जिनके पास पहले से 20 से 25 बकरियां हैं उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलेगा। बकरियों के पालन-पोषण के लिए भी विभाग उन्हें मदद करेगा। एनसीडीसी यानी नेशनल कापरेटिव डवलपमेंट कमीशन। राष्ट्रीय सहकारिता विकास आयोग का काम राज्य सरकार के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर गठित सहकारिता समूहों को वित्तीय मदद प्रदान करना है। सहकारिता समूहों को पशुपालन से लेकर अन्य कार्यों के लिए राज्य सरकार के माध्यम से विभागों के पास धन आवंटित किया जाता है और विभाग सहकारिता समूहों को लाभांवित करते हैं।

31

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *