पुलिस के अच्छे काम भी जनता तक पहुंचे-सीएम

जयपुर

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कानून की समीक्षा बैठक के बाद अपने ट्विटर पर ट्विट करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा सम्पादित किए जाने वाले अच्छे कार्यो की भी प्रशंसा की जानी चाहिए और पुलिस को चाहिए कि नकारात्मक कार्यो के प्रति सुधारात्मक कदम उठायें। उन्होने कहा कि राजस्थान में अपराध नियंत्रण करने में पुलिस की भूमिका सुधारात्मक कदमो की ओर है तभी हम आज कह सकते है कि अन्य प्रदेशों की अपेक्षाकृत राज्य में क्राइम रेशों में कमी आई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला हैल्प डेस्क, स्वागत कक्ष निर्माण, छात्रा आत्मरक्षा कौशल योजना, मुकदमों के त्वरित निस्तारण, थानों में आवश्यक रूप से एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था, राजकॉप सिटीजन एप, कमांड एवं कंट्रोल सेन्टर, साइबर ट्रेनिंग लैब की स्थापना जैसे नवाचारों से प्रदेश में आमजन को त्वरित न्याय मिलने में मदद मिली है महिला अपराधों के विरूद्ध विशेष अन्वेषण इकाई के गठन से दुष्कर्म के मामलों की तफ्तीश में लगने वाला औसत समय 267 दिनों से घटकर 118 दिन हो गया है. साथ ही राज्य में महिलाओं के विरूद्ध होने वाले अपराधों की लम्बित जांचों का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत 34 प्रतिशत के मुकाबले 9 प्रतिशत ही है। उन्होंने कहा कि नवाचारों के कारण महिलाएं अपने साथ हुए अपराधों की शिकायत दर्ज करने के लिए बिना किसी डर के थाने पहुंच रही है. गहलोत ने कहा कि नवाचारों से महिला अपराध के पंजीकरण में बढ़ोतरी हुई है. मुकदमों के त्वरित निस्तारण में गति आई है. इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि बलात्कार के प्रकरणों में जहां पूर्व में 30 प्रतिशत से भी ज्यादा मामले सीधे पुलिस के पास आने की बजाए कोर्ट के माध्यम से दर्ज होते थे. वे अब घटकर लगभग 13 प्रतिशत तक आ गए है. मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वॉरियर्स के रूप में पुलिस ने जो भूमिका निभाई और मास्क वितरण जैसे सामाजिक कार्यों में आगे बढकर योगदान दिया, वह प्रशंसनीय है मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस के अच्छे काम भी जनता तक पहुंचने चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस बिना किसी भेदभाव पीडि़त व्यक्ति की फरियाद सुने और उसे जल्द से जल्द राहत प्रदान करे कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, इसलिए कानून की पालना में किसी तरह का पक्षपात नहीं होना चाहिए. बैठक में बताया गया कि महिला अपराधों के विरूद्ध नवाचारों में छात्रा आत्मरक्षा के लिए 979 मास्टर ट्रेनर तैयार कर 4 लाख 38 हजार छात्राओं एवं 28 हजार 236 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है महिलाओं के विरूद्ध दर्ज अपराधों का न्यायालयों में त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए राज्य के समस्त 56 पोक्सो न्यायालयों में 56 विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति कर दी गई है इन प्रयासों का परिणाम है कि अब राजस्थान में महिलाओं के विरूद्ध अपराधों का न केवल पंजीकरण सुगम हुआ है, बल्कि पुलिस बल में लैंगिक संवेदनशीलता भी बढ़ी है. बैठक में गृह है और पुलिस विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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