प्रदूषण नियंत्रण अध्यादेश पर राष्ट्रपति ‎की मुहर

हवा की गुणवत्ता निगरानी के लिए गठित होगा आयोग

नई दिल्ली

देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मुहर लग गई हैं। हवा की गुणवत्ता की निगरानी के लिए एक आयोग गठित करने के लिए राष्ट्रपति ने एक अध्यादेश पर हस्ताक्षर किए। यह अध्यादेश वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से एक दिन पहले आया था। आयोग को अनुसंधान और वायु प्रदूषण से संबंधित समस्याओं की पहचान और समाधान के साथ काम सौंपा जाएगा। यह वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए शीर्ष निकाय के रूप में पर्यावरण प्रदूषण और रोकथाम नियंत्रण प्राधिकरण की जगह काम करेगा। 17 सदस्यीय आयोग में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के प्रतिनिधि होंगे। इसकी अध्यक्षता सचिव या मुख्य सचिव रैंक के एक सरकारी अधिकारी द्वारा की जाएगी, जिसे केंद्र द्वारा चुना जाएगा। आयोग में पर्यावरण मंत्रालय के सचिव और पांच अन्य सचिव या मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल होंगे। वे पदेन सदस्य होंगे। इससे पहले पर्यावरण मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने जानकारी दी थी कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार जल्द ही एक नया कानून लाएगी। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली ‘सफर’ के अनुसार दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 कणों की मात्रा में पराली जलाने से उत्पन्न हुए कणों का प्रतिशत मंगलवार को बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया जो कि इस मौसम में अब तक की सर्वाधिक मात्रा है। यह सोमवार को 16 प्रतिशत था, रविवार को 19 प्रतिशत और शनिवार को नौ प्रतिशत था। सफर के अनुसार पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की 1,943 घटनाएं हुई। हवा की गति धीमी होने और कम तापमान के कारण प्रदूषण कारक तत्व एकत्रित हो जाते हैं और हवा की रफ्तार तेज होने से वह छितरा जाते हैं। सफर के अनुसार बुधवार को एक्यूआई में थोड़ा सुधार होगा लेकिन बृहस्पतिवार को प्रदूषण के स्तर में वृद्धि हो सकती है।पर्यावरण सचिव आरपी गुप्ता ने कहा, श्नया कानून केवल दिल्ली और एनसीआर के लिए होगा। यह जल्द ही सामने आएगा। इसके जुर्माने संबंधी सूचना पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। यह नया कानून केवल दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए है। वायु कानून राष्ट्र के लिए है और यह जस का तस रहेगा।श् हाल ही में एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता के खराब होते स्तर को लेकर चिंता जताई थी और केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नया कानून लाएगा।

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