मांगों को लेकर किसान सभा ने किया सचिवालय कूच

देहरादून – अखिल भारतीय किसान सभा ने अपनी मांगों को लेकर सचिवालय कूच किया, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कुछ ही दूरी पर रोक दिया। इस दौरान उनकी पुलिस से नोक-झोंक हुई। उनका कहना था कि प्रत्येक कामगार को न्यूनतम 18 हजार रूपये प्रतिमाह वेतन दिया जाये और ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाई जाए। आशा, आंगनबाड़ी, भोजनमाता, पीटीसी, ग्राम प्रहरी,आदि स्कीम वर्करों को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाये।
किसान सभा के कार्यकर्ता यहां धरना स्थल पर अध्यक्ष सुरेकन्द्र सिंह सजवाण के नेतृत्व में बडी संख्या में एकत्रित हुए। वहां पर उन्होंने धरना प्रदर्शन कर सचिवालय कूच किया। उन्होंने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया, जिनमें प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी के पदों की बहाली की जाये, ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगे। राज्य सरकार द्वारा 2018 में में भूमि अधिग्रहण कानून में किये गये संशोधन को वापस लिया जाये आशा, आंगनबाड़ी, भोजनमाता, पीटीसी, ग्राम प्रहरी,आदि स्कीम वर्करों को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाये। प्रत्येक कामगार को न्यूनतम 18 हजार रूपये प्रतिमाह वेतन दिया जाये। संगठन ने कहा कि ग्राम पंचायत त्यूंखर में वर्ष 2010 से हुयी अने गम्भीर अनियमिताओं जिन्हें महिला एवं बाल विकास एवं जिला प्रशासन द्वारा दबाया जा रहा है आंगनबाड़ी केन्द्र खांकरा में कार्यरत आगनबाडी सहायिका मंजू बहूगुणा के साथ किये गये भेदभाव व आगबाडी केन्द्र चापड में की गई गम्भीर अनियमिताओं की जांच की जाय। सचिवालय कूच के दौरान किसान सभा के कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस की नोक-झोंक चलती रही। इस दौरान भारी संख्या में पहुॅचे कार्यकर्ता नारेबाजी करते रहे। जिस पर पुलिस अधिकारियों ने उन्हे समझाया और शांति व्यवस्था बनाये रखने की अपील की। किसान सभा रैली के दौरान सुंरेन्द्र सिंह सजवाण, गंगाधर नौटियाल, शिव प्रसाद देवली, राजाराम सेमवाल, जगिरा सिंह, भगवान सिंह राणा, बच्चीराम सेमवाल, मोहन सिंह रावत कमरूद्दीन आदि उपस्थित रहे।

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