श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है

हरिद्वार – महाराष्ट्र के नासिक से आए श्रद्धालुओं द्वारा श्रवणनाथ नगर स्थित बन्नु बिरादरी भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत् कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित ऋषिकेश पुरी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कथा की सार्थकता तब सिध्द होती है। जब हम इसे अपने जीवन व व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हुए अपना आत्म कल्याण करें। भागवत कथा श्रवण से तमाम संशय दूर हो जाते हैं। मन का शुद्धिकरण होता है और शंाति व मुक्ति मिलती है। इसलिए सद्गुरु के सानिध्य में कथा का अनुकरण एवं निरंतर हरि स्मरण करना चाहिए। श्रीमदभागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। अन्य युगों में जहां धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते थे। वहीं कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। सोया हुआ ज्ञान तथा वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है। श्रीमद्भागवत कथा कल्पवृक्ष के समान है। जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है। अ_ारह पुराणों में से एक श्रीमद्भागवत कथा का मुख्य विषय भक्ति योग है। भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद्भागवत कथा मोक्षदायिनी है। इसके श्रवण से ही राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में आज भी इसके प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं। सत्संग व कथा के माध्यम से ही मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है। मनुष्य इस संसार में आकर मोहमाया के चक्कर में पड़ जाता है। मोहमाया के जाल से बचने के लिए मनुष्य को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग व कथा के लिए प्रेरित करें। भगवान की कथा श्रवण के अवसर हर किसी को प्राप्त नहीं होते। कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा साक्षात श्रीहरि का रूप है। पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्यों का फल प्राप्त होता है। पूर्व मण्डी समिति अध्यक्ष संजय चोपड़़ा ने श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करने पर श्रद्धालुओं को साधुवाद देते हुए कहा कि हरिद्वार की पवित्र भूमि व गंगा तट पर कथा श्रवण का पुण्यफल सभी श्रद्धालुओं को अवश्य प्राप्त होगा।

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