ब्रह्मलीन स्वामी हंसदेवार्य महाराज दिव्य संत थे : महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत

हरिद्वार – कालिका पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने कहा कि श्रीमज्जद्गुरू रामानन्दाचार्य हंसदेवाचार्य महाराज एक महान संत तथा दिव्य पुरूष थे। सडक़ दुघर्टना में उनके आकस्मिक निधन से सनातन धर्म व संत समाज को अपार क्षति हुई है। संत समाज ने अपना एक प्रखर प्रवक्ता खो दिया है। अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए उनका संघर्ष हिन्दू समाज सदैव याद रखेगा। भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म के प्रति उनका योगदान सबकी स्मृतियों में सदैव जीवंत रहेगा। स्वामी गुरूशरणानंद महाराज, श्रीमहंत रघुमुनि दास, श्रीमहंत महेश्वरदास, श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह, मुखिया महंत भगतराम महाराज ने कहा कि संत का जीवन निर्मल जल के समान होता है। संतो की वाणी से समाज का मार्गदर्शन होता है। ब्रह्मलीन हंसदेवाचार्य महाराज ने मानव कल्याण में बढ़चढ़ कर योगदान दिया। सनातन परम्पराओं का निर्वहन उनके द्वारा किया जाता रहा है। उनके अधूरे कार्यो को संत समाज को मिलजुल कर पूरा करना चाहिए। उन्होंने समाज को धार्मिक रीति रिवाजों से अवगत कराते हुए सनातन परम्पराओं को मजबूत करने में उल्लेखनीय योगदान किया। उनके ब्रह्मलीन होने से हुई अपूर्णीय क्षति को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा। दक्षिण काली मंदिर पीठाधीश्वर म.म.स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि भक्तों के कल्याण में ब्रह्मलीन हंसदेवाचार्य के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। निर्धन परिवारों की कन्याओं के विवाह कराने में उन्होंने हमेशा सहयोग किया। उनके द्वारा समाज को सच्चाई पर चलने का संदेश भी दिया जाता रहा है। उनकी वाणी से हमेशा ही श्रद्धालु भक्त प्रेरित होकर धार्मिक क्रियाकलापों में तल्लीनता से जुटे रहते थे। गंगा और गौसेवा के कई प्रकल्प देश भर में उनके द्वारा चलाए गए। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सरकारों को समय समय पर निर्देशित भी किया जाना उनके प्रासंगिक जीवन का उदाहरण है। उनके पदचिन्हों पर चलकर सनातन परम्पराओं का निर्वाह युवा संतों को भी करना चाहिए। केंद्रीय मंत्री म.म.साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी हंसदेवाचार्य सदैव ही महिलाओं को उचित सम्मान देते चले आ रहे थे। उनके अचानक ब्रह्मलीन हो जाने से पूरे भारत को अपूर्णीय क्षति हुई है। श्रद्धांजलि देने वालों में स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, महंत शिवशंकर गिरी, महंत साधनानंद, महंत विनोद गिरी, स्वामी ऋषि राम कृष्ण, महंत ईश्वरदास, महंत राजकुमार दास, सतपाल ब्रह्मचारी, विधायक स्वामी यतीश्वरानंद, स्वामी शिवानंद भारती, स्वामी हरिचेतनानंद, महंत विष्णुदास, महंत मोहनसिंह, स्वामी ललितानंद गिरी, आईडी शास्त्री, महंत कमलजीत सिंह, महंत जसविन्दर सिंह, महंत रूपेंद्र प्रकाश, स्वामी कपिल मुनि महाराज, संत जगजीत सिंह, निरंजन स्वामी, महंत रामकिशन दास, श्रीमहंत नारायण गिरी, महंत दलीप दास, श्रीमहंज राजेंद्रदास, श्रीमहंत धर्मदास, श्रीमहंत गौरीशंकर दास, स्वामी धर्मदेव महाराज, महंत प्रेमदास, महंत जयेंद्र मुनि, महंत दामोदर दास, महंत रविन्द्रपुरी, महंत राजेंद्रानंद सहित कई संत महापुरूषों ने ब्रह्मलीन श्रीमज्जदगुरू रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज को महान संत बताते हुए अपनी और से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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