सरकार चाहे, तो दस मिनट में अनुच्छेद 370 को निष्प्राण बना सकती है।

कपिल वर्मन
दिल्ली – जब मौलिक अधिकार के अनुछेद में संशोधन हो सकता है तो अनुछेद 370 में क्यों नहीं ?सरकारी भांड मिडिया और भाजपा के पिच्छल्गू अनुछेद 35 (A) की दुहाई दे रहे है और कह रहे है कि अनुछेद 35 (A)’ अनुच्छेद 370 को हटने में रोड़ा अटका रहा है। इस प्रकार के झूठे और आधारहीन दुस्प्रचार कर देश की जनता को भाजपा भर्मित करने का प्रयास कर रही है। भारतीय संविधान के अनुछेद 368 के अनुसार संसद द्वारा संविधान में प्रदत  मौलिक अधिकारों  में भी संशोधन कर सकती है।क्या है अनुछेद 35 (A):-  अनुछेद 35 (A) मात्र एक राष्ट्रपति आदेश (prcidencial order) हैं।  इस आदेश को अभी तक कोई  संवैधानिक दर्जा  प्राप्त नहीं है और न ही इस आदेश का  संविधान में कोई स्थान है। अगर यकीन न हो रहा हो तो संविधान को देख सकते हो।  क्योकिं संवैधानिक संशोधन के लिए मात्र एक ही रास्ता है वो है दोनों सदनों में  दो तिहाई मतों की विशेष सहमति ।तत्कालीन सरकार द्वारा अनुछेद 370  को अधिक  मज़बूत बनाने की नियत से  तत्कालीन राष्ट्रपति के हाथों  एक राष्ट्रपति आदेश (prcidencial order) पारित करवाया , जिसके तहत  अनुछेद 370 में संशोधन करने से पहले जम्मू-कश्मीर की विधानसभा की सहमति लेनी आवश्यक  होगी। जम्मू-कश्मीर विधानसभा  की सहमति के बिना भारतीय संसद  अनुछेद 370 में कोई बदलाव नहीं कर  सकता। यह आदेश  कोई संवैधानिक संशोधन नहीं था, बल्कि  राष्ट्रपति का एक  मात्र आदेश था।यह सर्वविदित है कि भारत के राष्ट्रपति पद  सरकार की एक मोहर की भूमिका में होता है जिस राष्ट्रपति आदेश को तत्कालीन राष्ट्रपति ने 4 मई 1954 को आदेशित किया था , उसी आदेश को वर्तमान राष्ट्रपति निरस्त करने की संवैधानिक शक्तियां  रखते है।फिर क्या कारण है की मोदी जी की केंद्र  सरकार अनुछेद 370 को निस्प्रभावी करने में अपने को निःसहाय समझ रही हैं। कहीं अनुछेद 370 को राम मन्दिर की तरह चुनावी मुद्दा तो नहीं मान रही है।अपील : सभी सम्मानित भारतीय नागरिकों से विनम्र निवेदन है कि संसदीय लोकतंत्र और भारतीय संविधान को सुरक्षित रखने के लिए जिसके तहत प्रत्येक नागरिक की गरिमा के साथ एकता और अखंडता सुरक्षित करने की व्यवस्था हैं। उसके लिए साम्प्रदायिक और अलगाववादी ताकतों को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएं। और एक ऐसा राज स्थापित करें जहाँ सामाजिक ,आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय के साथ समानता और स्वतंत्रता का माहौल कायम हो सके।संविधान की सुरक्षा में ही हमारी सुरक्षा निहित है|

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