विधान परिषद उम्मीदवार विद्या गौतम को विपिन चौहान ने दिया समर्थन

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अपील —
उत्तर प्रदेश में स्नातक व शिक्षक कोटे के आठ आठ विधान परिषद सदस्यो का चुनाव होता है। स्नातक कोटे की मेरठ सहारनपुर मण्डल की सीट पर आपकी बहन विद्या गौतम चुनाव लड़ रही है। मेरे सामने कई बडे बाहुवली व धनवली प्रत्याशी चुनावी मैदान है। मेरा आपसे वादा है कि अपने घोषणा पत्र में जो सुविधाये देने या दिलवाने का वादा मैने किया है। उसके लिये चाहे मुझे अपने विधान परिषद सदस्य के अधिकारो का इस्तेमाल करना पडे उनसे काम ना चले तो आन्दोलन करना पडे या माननीय हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाना पडें कैसे भी अपने वादे को हर सम्भव पूरा करने को प्रयास रहेगा। यहा बताना चाहती हू कि 2012 से अपनी नौकरी अपना घर अपने जीवन के सारे सुख सुविधाये छोड़कर केवल देश व समाज के लिये कार्य कर रही हू।
उत्तर प्रदेश मे जब से विधान परिषद सदस्य स्नातक कोटे को चुनाव होना शुरू हुआ है। तब से लेकर आज तक इससे जुडे हक अधिकारो की लडाई लडना तो दूर की बात है। अब तक उत्तर प्रदेश के 95 प्रतिशत लोग स्नातक एमएलसी के बारे में नही जानते । उदाहरणतः मेरठ, सहारनपुर स्नातक सीट व शिक्षक एमएलसी कौन है, इस सीट का क्षेत्रफल कितना है, कितनी सामान्य विधानसभा, लोकसभा इस क्षेत्र में आती है, कितने जनपद आते है, कितनी तहसील, कितने ब्लाक, कितने नगर निगम, कितनी नगरपालिका, कितनी नगर पंचायत इस चुनावी क्षेत्र मंे सम्मलित है। अधिकतर लोगो को नही पता है। एमएलसी के कार्य, अधिकार कृत्वयो की जानकारी या उसके द्वारा किये गये जनहित के कार्यो की जानकारी कहा होगी। ये सब वाते मुझे यहा इसलिये कहनी पड रही है कि ताकि आप लोग जो मेरठ,सहारनपुर स्नातक सीट के वोटर है या निवासी है। वो जानपाये की उत्तर प्रदेश में स्नातक एमएलसी कोटे की स्थापना से लेकर आज तक जो कार्य नही हो पाये उन्हे मौजूदा राजनीतिक हालातो में कैसे पूरा किया जायेगा?
स्नातक एमएलसी अपने हक अधिकार का इस्तेमाल कर अपनें क्षेत्र की व्यवस्थाओ को सुधारना भी चाहेगा। तो अब उसे कडा सघर्ष करना होगा । आवश्यकता है ऐसे व्यक्तित्व की जिसकी कोई कमजोरी ना हो जिसके पास क्षेत्र वासियो की व प्रदेशवासियो की सेवा करने के लिये पूरा समय हो । क्योकि इस सीट का क्षेत्रफल ही 9 जनपदो 9 लोकसभाओ ,44 विधानसभाओ , 71 ब्लाको , 47 नगरपंचयतो, 34 नगर पालिकाओ, 3 नगर निगम के कार्य क्षेत्रो तक फैला है। इतनी बडी सीट पर काम करने के लिये समय चाहिये तथा बिना कमजोरी वाला नेतृत्व चाहिये । जिस प्रत्याशी की कमजोरीया होगी वो जीत कर भी सरकार की गलत नीतियो का विरोध नही कर सकेगा। अर्थात कोई धनवली, उद्योगपति, कालेजो व अस्पतालो का संचालक तथा पति या बाप की बडी सरकारी नौकरी से सम्वन्धित व्यक्ति जीत कर विधान परिषद गया तो वहा गुंगा और वहरा बनकर बैठेगा। आपके हितो के लिये यदि सघर्ष का प्रयास किया तो कालेज,अस्पताल,व्यापार या सम्बन्धित उद्योगो की जांच होना स्वाभाविक है। आपके लिये सघर्ष करना तो दूर खुद की जान बचाने के लाले पडे रहेगे। आपकी बहन चुनावी समय में धुमने के लिये महगी गाडीया, मंहगे होटलो में खाना पीना तो नही करा सकती । लेकिन विधान परिषद में बिना किसी दबाव व भय के आपकी आवाज बनकर गुंज सकती है। उत्तर प्रदेश की लचर भर्ती व्यवस्था ,छात्रवृत्ति की व्यवस्था अपने अधिवक्ता , अध्यापक अन्य कर्मचारी/अधिकारी व युवाओ के हक अधिकारो की लड़ाई को दम दारी से लड़ सकती हूॅ। यदि आप मुझे अपना आर्शिवाद देकर विधान परिषद भेजते है तो मै आपसे वादा करती हू। अगले 6 वर्षो में प्रदेश का बच्चा बच्चा जान जायेगा कि स्नातक कोटे के एमएलसी का कार्य व अधिकार क्या होता है और सरकार की गलत नीतियो के विरूद् कैसे लड़ा जाता है। तथा सही हाथो तक रोजगाार अधिकार व सम्मान कैसे पहुचाया जाता है।

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