पढिये — कन्धरासन की विधि व लाभ

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कन्धरासन

विधि –

सर्वप्रथम पीठ के बल भूमि पर लेट जाएँ और दोनों पैरों को इस प्रकार से मोड़ लें कि एडियाँ नितम्ब के पास आ जाएँ । इसके बाद दोनों हाथों से दोनों टखनों को पकड़ लें और श्वास को अन्दर भरने के बाद अपनी पीठ व नितम्ब को यथासम्भव ऊपर की ओर उठाएँ । इस स्थिति में कंधे , सिर व दोनों एड़ियाँ भूमि से लगी रहेंगी । श्वास को अन्दर ही रोककर सरलता से यथा शक्ति इसी स्थिति में ठहराने का प्रयास करें । कुछ समय इस स्थिति में ठहरने के पश्चात् नीचे आएँ और श्वास को छोड़ दें । इस प्रकार इसकी 3—4 आवृत्ति करें।

लाभ –

यह आसन पेट दर्द एवं पीठ दर्द में विशेष उपयोगी है । सूर्य केन्द्र ( नाभि ) को स्थिर रखने एवं बहनों के मासिक धर्म सम्बन्धी विकार , श्वेत प्रदर , रक्त प्रदर , बंध्यत्व एवं पुरुषों के समस्त धातु सम्बन्धी रोगों को दर करता है ।

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