हूणो को गुर्जर मानने पर अलग अलग राय

गुर्जर—प्रतिहारो की उत्पत्ति् का प्रश्न बहुत ही विवादास्पद है। कंनिघम इन्हे यू— ची जाति का वंशज मानते है। और इनका संबंध कुषाण जाति से बताते है इनके मत का अधिकार है — ब्रोच गुर्जर नामक एक ताम्रपत्र की ऐतिहासिकता में सदेह है इसलिये उस पर आधारित तथ्यो को भी पूर्णरूपेण स्वीकार नही किया जा सकता है। जो विद्वान इन्हें विदेशी मानते है। उनका कहना है कि गुर्जर हूणो के साथ भारत आये थे। गुर्जरो को हूणो के साथ ही भारत मे आने वाली जाति मानने में कुछ कठिनाइया पेश आती है । यदि गुर्जर हूणो के साथ ही भारत मे आए होते तो साहित्य अथवा अन्यत्र जहा हूणो का उल्लेख मिलता है वही गुर्जरो का भी उल्लेख होना चाहिए था परंतु वास्तव में ऐसा नही मिलता। बाण के हर्षचरित में हूणो के आक्रमण का वर्णन है वहां गुर्जरो का नाम तक नही । इसके उत्तर में जैकसन का कहना है। कि चूकि गुर्जर हूणो के अधीन ही एक शाखा थीं। इसलिए उनका उल्लेख नही मिलता। क्या यह आश्चर्य की बात नही कि महाभारत के भीष्मपर्व मे हूणो का उल्लेख मिलता है। पन्तु संपूर्ण महाकाव्य में गुर्जरो का उल्लेख नही मिलता। यदि अन्य छोटी छोटी जातियो का उल्लेख महाभारत में मिल सकता है तो क्या कारण है कि गुर्जरो का उल्लेख नही किया गया। यदि यह मान लिया जाए कि गुर्जर एक निर्बल जाति थी जिसका उल्लेख आवश्यक नही समझा गया। तो यह माना और भी कठिन हो जाता है। कि किस प्रकार एक निर्बल जाति ने इतनी शीघ्र् शक्ति प्राप्त कर ली। गुर्जर राज्य पश्चिमी भारत का दूसरा सबसे बडा राज्य कहता है। जहां चीनी यात्री गुर्जर राज्य में राजा के क्षत्रिय जाति होने की बात करता है। वहा वह हूणो के सबंध में बिलकुल कुछ नही लिखता ।प्राचीन साहित्य और अभिलेखो में गुर्जरो और हूणो का साथ साथ वर्णन न मिलना ही इस बात को प्रमाणित करता है कि इन दोनो का परस्पर कोई सबंध नही था। यदि गुर्जर छठी शताब्दी में बाहर से आने वाली कोई जाति थी ,तो उनका किसी भारतीय शक्ति से युद्व होना भी अवश्यभावी था। परन्तु इस प्रकार के किसी संघर्ष का प्रमाण ही अभी तक नही मिला । यदि उन्होने भारत में आकर बसने का निश्चय कर ही लिया था। तो पंजाब जैसी उपजाउ भूमि को छोडकर राजस्थान में ही रहने का निश्चय क्यों किया। इसके अतिरिक्त किसी भी विदेशी जाति का हिन्दू—समाज ने ब्राहामण—वर्ण में नही लिया। या तो उन्हें शू्द्र गनाया अथवा जो शारिरिक रूप से अधिक शक्तिशाली थे उन्हें क्षत्रिय बना दिया कही भी हूण—ब्रहामण का उल्लेख नही मिलता परन्तु गुर्जर—ब्राहमण का वर्णन मिलता है। अगर गुर्जर विदेशी होते तो ऐसा होना असंभव था

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